SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 131
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ दशाश्रुत० छेदसूत्र अन्तर्गत प्रत सूत्रांक/ गाथांक [२०] दीप अनुक्रम [ २८० ] “कल्पसूत्रं (बारसासूत्रं) (मूलम्) मूलं- सूत्र. [२०] / गाथा ||-|| मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ...... "कल्प ( बारसा) सूत्रम्" मूलम् ॥ ६० ॥ कल्प वासावासं पज्जोसवियस्स निश्ञ्चभत्तियस्स भिक्खुस्स कप्पइ एगं गोअरकालं गाहावइकुलं भत्ताए वा पाणाए वा निक्खमित्तए वा पविसित्तए वा, नन्नत्थायरियवेयावच्चेण वा | एवं उवज्झायवे ० तवस्सिवे० गिलाणवे० खुड्डएण वा खुड्डियाए वा अवंजणज़ायएण वा ॥ २० ॥ वासावासं पजोसवियस्स चउत्थभत्तियस्स भिक्खुस्स अयं एवइए विसेसे-जं से पाओ निक्खम्म पुवामेव वियडगं भुच्चा पिच्चा पडिग्गहगं संलिहिय संपमजिय से य संथरिजा, कप्पइ से तद्दिवसं तेणेव भत्तद्वेणं पजोसवित्तए-से य नो संथरिजा, एवं से कप्पइ दुञ्चपि गाहावइकुलं भत्ताए वा पाणाए वा निक्खमित्त वा पविसित्तए वा ॥ २१॥ वासावासं पज्जोसवियस्स छट्टभत्तियस्स भिक्खुस्स कप्पंति दो गोअरकाला गाहावइकुलं भत्ताए वा पाणाए वा निक्ख० पविसि ० ॥२२॥ वासावासं पज्जोसवियस्स अट्टमभत्तियस्स भिक्खुस्स कप्पंति तओगोअरकाला गाहावइकुलं भत्ताए वा पाणाए वा निक्खमि पविस० ~ 131~ बारसो ।। ६० ।।
SR No.035040
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 40 Kalpsutra Moolam Chatusharan Tandulvaicharik Gacchachar Mool evam VruttiMool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages394
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_kalpsutra
File Size105 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy