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________________ आगम (४५) [भाग-३९] “अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) .......... मूलं [१४३] | गाथा ||११३-११४|| ....... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१४३] गाथा: ||--|| आयामविक्खंभेणं जोअणं उव्वेहेणं तं तिगुणं सविसेसं परिक्खेवेणं, से णं पल्ले एगाहिअबेआहिअतेआहिअ जाव भरिए वालग्गकोडीणं, ते णं वालग्गा णो अग्गी डहेजा जाव णो पूइत्ताए हव्वमागच्छेज्जा, जे णं तस्स पल्लस्स आगासपएसा तेहिं वालग्गेहिं अप्फुन्ना तओ णं समए २ एगमेगं आगासपएसं अवहाय जावइएणं कालेणं से पल्ले खीणे जाव निट्रिए भवइ से तं ववहारिए खेत्तपलिओवमे । एएसिं पल्लाणं कोडाकोडी भवेज दसगुणिया । तं ववहारिअस्स खेत्तसागरोवमस्स एगस्स भवे परीमाणं ॥१॥ एएहिं ववहारिएहिं खेतपलिओवमसागरोवमेहिं किं पओअणं?, एएहिं व० नस्थि किंचिप्पओअणं, केवलं पण्णवणा पण्णविजइ, से तं वव० से किं तं सुहुमे खेतपलिओवमे १२ से जहाणामए पल्ले सिआ जोअणं आयाम० जाव परिक्खेवेणं से णं पल्ले एगाहिअबेआहिअतेआहिअ जाव भरिए वालग्गकोडीणं तत्थ णं एगमेगे वालग्गे असंखिजाई खंडाई कजइ, ते णं वालग्गा दिट्ठीओगाहणाओ असंखेजइभा दीप अनुक्रम [२९३-२९७] ~394
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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