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________________ आगम (४५) प्रत सूत्रांक [१४२ ] गाथा: II--II दीप अनुक्रम [ २८९ -२९२] [भाग-३९] “अनुयोगद्वार " - चूलिकासूत्र - २ ( मूलं+वृत्तिः) मूलं [१४२] / गाथा ||१११-११२|| पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ... आगमसूत्र -[ ४५], चूलिकासूत्र - [२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्तिः Ja Eber तगगन्भवतियउरपरिसप्पथलयरपंचिंदियजाव गो० ! जहन्नेणवि अंतो० उक्कोसेणवि अंतो०, पजत्तयगब्भवकंतियउर परिसप्पथलयरपंचिंदियजाव गो० ! जह० अंतो० उक्को० पुव्वकोडी अंतोमुहुत्तूणा, भुअपरिसप्पथलयरपंचिंदियजाव गो० ! जहपण अंतो उक्कोसेणं पुव्वकोडी, संमुच्छिमभुयपरिसप्पथल० गो० ! जह० अं० उक्को० बायालीसं वाससहस्साई, अपज्जत्तयसंमुच्छिमभु अपरिसप्पथलयर पंचिंदिय जाव गो० ! जह० अंतो० उक्को० अंतों०, पज्जत्तगसंमुच्छिम भुअपरिसप्पथलयरपंचिंदिय जाव गो० ! जह० अंतो० उक्को० बायालीसं वाससहस्साइं अंतो०, गब्भवकंतियभुअपरिसप्पथलयर पंचिंदिय जाव गो० ! जह० अंतो० उक्को० पुव्वकोडी, अपजत्तयगब्भवक्कंतियभुअपरिसप्पथलयरपंचिंदियजाव गो० ! जहन्नेणवि अंतो० उक्कोसेणवि अंतो०, पज्जत्तयगन्भवतियभु अपरिसप्पथलयरपंचिंदिय जाव गो० ! जह० अंतो० rato yoवकोडी अंतीमुत्तूणा, खहयरपंचिंदिय जाव गो० ! जह० अंतो० उक्को० For P&Pealise Cinly अस्य सूत्रस्य क्रम: ‘१४०' वर्तते, परन्तु मुद्रण अशुद्धित्वात् '१४२' इति क्रम मुद्रितं ~386~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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