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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ........... मूलं [१२८] / गाथा ||३२-३८|| ................... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-[२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१२८] वृत्तिः उपकमाधि० ॥१२९॥ गाथा: ||१-३२|| SACROSC अनुयो नम्-अवस्थानं भुवि यस्याः सा गोधा चौवनद्धा गोधिका-वाद्यविशेषो ददरिकेत्यपरनाम्ना प्रसिद्धा, आडमलधा-16 म्बर:-पटहः, सप्तममिति निषादमित्यर्थः। रीया एपसि णं सत्तण्हं सराणं सत्त सरलक्खणा पण्णत्ता, तंजहा-सजेण लहई वित्तिं, कयं च न विणस्सइ । गावो पुत्ता य मित्ता य, नारीणं होइ बल्लहो ॥ ८॥ रिसहेण उ एसज्ज (पसेज), सेणावच्चं धणाणि अ । वत्थगंधमलंकारं, इथिओ सयणाणि य ॥९॥ गंधारे गीतजुत्तिपणा, वजवित्ती कलाहिआ। हवंति कइणो धण्णा, जे अण्णे सत्थपारगा ॥ १०॥ मज्झिमसरमंता उ, हवंति सुहजीविणो । खायई पियई देई, मज्झिमसरमस्सिओ ॥ ११ ॥ पंचमसरमंता उ, हवंति पुहवीपई । सूरा संगहकत्तारो, अणेगगणनायगा ॥ १२ ॥ रेवयसरमंता उ, हवंति दुहजीविणो । कुंचेला य कुवित्ती य, चोरा चंडालमुट्रिया ॥ १३ ॥ णिसायसरमंता उ, होति कलहकारगा । जंघाचरा लेहवाहा, हिंडगा भारवाहगा ॥ १४ ॥ १ साउशिया गाउरिया सोयरिया य मुहिआ इति पाठानुसारिणी मृत्तिः. दीप अनुक्रम [१६४-२०४] ORE ॥१२९॥ JECT ~269~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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