SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 251
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ............ मूलं [१२७] / गाथा ||२४|| .................. पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-[२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१२७] अनुयो. मलधारीया दृत्तिः उपक्रमाधिक ॥१२०॥ गाथा ||१|| जुण्णगुलो जुण्णघयं जुण्णतंदुला चेव । अब्भा य अब्भरुक्खा संझा गंधव्वणगरा य ॥१॥ उकावाया दिसादाहा गज्जियं विज्जू णिग्घाया जूवया जक्खादित्ता धूमिआ महिआ रयुग्घाया चंदोवरागा सूरोवरागा चंदपरिवेसा सूरपरिवेसा पडिचंदा पडिसूरा इंदधणू उदगमच्छा कविहसिया अमोहा वासा वासधरा गामा णगरा घरा पव्वता पायाला भवणा निरया रयणप्पहा सकरप्पहा वालुअप्पहा पंकप्पहा धूमप्पहा तमप्पहा तमतमपहा सोहम्मे जाव अञ्चए गेवेजे अणुत्तरे ईसिप्पभारा परमाणुपोग्गले दुपएसिए जाव अणंतपएसिए, से तं साइपारिणामिए । से किं तं अणाइपारिणामिए १, २ धम्मत्थिकाए अधम्मत्थिकाए आगासस्थिकाए जीवस्थिकाए पुग्गलथिकाए अद्धासमए लोए अलोए भवसिद्धिआ अभवसिद्धिआ, से तं अणाइपारिणामिए । से तं पारिणामिए । सर्वथा अपरित्यक्तपूर्वावस्थस्य यद्रूपान्तरेण भवन-परिणमनं स परिणामः, तदुक्तम्-"परिणामो वर्धा दीप अनुक्रम [१६१-१६३] ॥ १२०॥ मा ~251~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy