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आगम (४३)
[भाग-३७] “उत्तराध्ययनानि”- मूलसूत्र-४ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) अध्ययनं [३६], मूलं [-] / गाथा ||१५-४६|| नियुक्ति : [५५६...], भाष्यं [१५...]
प्रत सूत्रांक [१५-४६]
पायेब, भइए संठाणोवि अ॥२५॥ वपणओ सुकिले जे छ, भइए से उ गंधओ । रसओ फासओ चेव, लाभाए संठाणओवि अ ॥ २६ ॥ गंधओ जे भवे सुब्भी, भइए से उ वण्णओ । रसओ फासओ चेय, भहए
ठाणओवि अ ॥ २७ ॥ गंधओ जे भवे दुब्भी, भइए से उ वण्णओ। रसओ फासओ चेव, भहए संठाण४ ओवि अ ॥२८॥ रसओ तित्तओ जे उ, भइए से उ वन्नओ । गंधओ फासओ चेव, भइए संठाणओवि Gय ॥२९॥ रसओ कडुए जे उ, भइए से उ वण्णओ। गंधओ फासओ चेव, भइए संठाणओवि अ ॥३०॥ रसओ कसाए जे उ, भइए से उ वणओ। गंधओ फासओ चेव, भइए संठाणओवि अ॥ ३१॥ रसओ अंबिले जे उ, भइए से उ वण्णओ । गंधओ फासओ चेव, भइए संठाणओवि अ॥ ३२॥ रसओ महुरए जे उ, भइए से उवण्णओ। गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओवि य ॥ ३३ ॥ फासओ कक्खडे जे उ,
भइए से उ वण्णओ। गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओवि अ॥३४॥ फासओ मउए जे उ, भइए से उ ४ वण्णओ। गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओवि अ॥ ३५॥ फासओ गुरुए जे उ, भइए से उ वष्णओ। दगंधओ रसओचेव, भइए संठाणओवि य ॥३६॥ फासओ लहुए जे उ, भइए से उ वण्णओ। गंधओरसओ
चेच, भइए संठाणओवि अ॥३७॥ फासओ सीअए जे उ, भइए से उ वण्णओ। गंधओ रसओ चेव भइए संठाणओवि अ॥ ३८॥ फासओ जणहए जे उ, भइए से उ वपणओ। गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओवि अ ॥ ३९ ॥ फासओ निद्धए जे उ, भइए से उ वष्णओ। गंधओ रसओ चेव, भइए संठाण
RASIR
दीप अनुक्रम [१४७९-१५१०]
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पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र[४३), मूलसूत्र[४] उत्तराध्ययनानि मूलं एवं शान्तिसूरिविरचिता वृत्ति:
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