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________________ आगम (४०) [भाग-३१] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१/४ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) अध्ययन [४], मूलं [सू.] / [गाथा-], नियुक्ति: [१२८४] भाष्यं २०६...], प्रत सूत्रांक [सू.] रिजा अमरिसिओ भणइ-मारिजउ, ताहे इंगालखड्डा कया, ताहे सेयण ओ ओहिणा पेच्छह न वोलेड खड़, कुमारा भणंतिता निमित्तं इमं आवई पत्ता तोषि निच्छसि', ताहे सेयणएण खंधाओ ओयारिया, सो य ताए खडाए पडिओ मओ रयणप्पहाए नेरइओ उववष्णो, तेवि कुमारा सामिस्स सीसत्ति बोसिरंति देवयाए साहरिया जत्थ| भयवं तित्थयरो विहरइ, तहवि णयरी न पडइ, कोणियस्स चिंता, ताहे कूलवालगस्स रुहा देवया आगासे भणइ|'समणे जइ कूलवालए मागहियं गणियं लगेहिती । लाया य असोगर्चदए, वेसालिं नगरि गहिस्सइ ॥१॥सुणेतओ४ हाचेव चपं गओ कूलवालय पुच्छइ, कहियं, मागहिया सद्दाविया विडसाविया जाया, पहाविया, का तीसे उप्पत्ती जहा णमोकारे पारिणामियबुद्धीए थूभेत्ति-सिद्धसिलायलगमणं खुड्डगसिललोहणा य विक्खंभो । सावो मिच्छावाइत्ति |निग्गओ कुलचालतवो ॥१॥ तायसपाली नइवारणं च कोहे य कोणिए कहणं । मागहिगमणं बंदण मोदगअइसार| मात, अपितो भणति-मार्यता, तदाकारगा कृता, तदा सेचनकोऽवधिना पश्यति, नातिकामति गती, कुमारी भणत: तब निमिपार्मिषमापतिः प्राप्ता समापि नेपासि, सदा सेचनफेन स्कन्धादयतारिती, स प तस्यां गायो पतितो मृतो रसप्रभायो नैरपिक जापाः, तावपि कुमारी स्वामिनः शिष्याविति पुरगजन्ती देवतया संहती यन्त्र भगवान् सीर्थकरो विहरति, तथापि भगरी न पतति, कोणिकस चिन्ता. सदा सवालकाय का भणति-धमणः कूलवालको यदि मागधिका वेश्यां सगियति । राजा पाशोकचन्दो वैशाली नगरी महीव्यति ॥ ॥ ध्वमेव चम्पां गतः कूलवालक पृच्छति, कथितं, मागधिका शब्दिता विश्रानिका जाता, प्रथापिता, का तथा उत्पत्तियथा नमस्कारे पारिणामिकीवुद्धी स्तूप इति, सिद्धशिलासहगमनं दुखकेन शिलालोहनं च विकम्भः (पादप्रसारिका)माणे मिथ्यावादीति निर्गतः फूलपालकतपः ॥1॥ तापसपली नदीवारणं च कोधे कोणिकाय (देवतया) कथितं । मायधिकागमनं वन्दनं मोदकाः मतीसारः KC दीप अनुक्रम [२६] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यक मूलं एवं हरिभद्रसूरि-रचिता वृत्ति: ~59~
SR No.035031
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 31 Aavashyak Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size90 MB
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