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________________ आगम (४०) [भाग-३१] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१/४ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्तिः ) अध्ययनं [५], मूलं [सू.] / [गाथा-], नियुक्ति: [१५२८...] भाष्यं [२३१..., कायोत्स ध्य० प्रतिक्रमण प्रत सूत्रांक ॥७९४॥ आवश्यक- पडियमावेह, इत्यादि पूर्ववत्, एवं चाउमासियपि, नवरं काउस्सगे पंचुस्साससयाणि, एवं संवच्छरियपि नवरं काउ- हारिभ- 12स्सग्गो अहसहस्सं उस्सासाणं, चाउमासियसंवच्छरिएम सवेवि मूलगुणउत्तरगुणाणं आलोयणं दाङ पडिकमंति, खेत्तद्रीया द्र देवयाए उस्सगं करेंति, केई पुण चाउमासिगे सिजदेवयाएवि उस्सगं करेंति, पभाए य आवस्सए कए पंचकल्लाणगं| MIगिहंति, पुषगहिए य अभिग्गहे निवेदेति, अभिग्रहा जइ संमं णाणुपालिया तो कुइयककराइयस्स अस्सगं करेंति, पुणोऽवि अण्णे गिण्हंति, निरभिग्गहाण न वट्टइ अच्छिउँ, संवच्छरिए य आवस्सए कए पाओसिए पज्जोसवणा कप्पो | कड्डिजति, सो पुण पुषिं च अणागयं पंचरत्तं कहिजइ य, एसा सामायारित्ति, एनामेव कालतः उपसंहरन्नाह भाष्यकार:|चाउम्मासियवरिसे आलोअण नियमसोहुदायब्बा। गहणं अभिग्गहाण य पुब्वगहिए निवेएउं॥२३२॥ (भा०) चाजम्मासिषवरिसे उस्सग्गो खित्तदेवयाए उ । पक्खिय सिजसुरीए करिति चउमासिए वेगे ॥२३३॥ (भा०) गाथाद्वयं गतार्थ । अधुना नियतकायोत्सर्गप्रतिपादनायाह दीप अनुक्रम [६२] HNA ७९४।। प्रतिकामयत, एवं चातुर्मासिकमपि, पर कायोत्सर्ग पयोमासशतानि, एवं सांवत्सरिकमपि गबरं कायोत्सर्गोऽसहसमुच्छालानां । चातुर्मासिकसांवत्सरिकयोः सर्वेऽपि मूलोत्तरगुणानामालोचना दवा प्रतिकाम्यन्ति क्षेत्रदेवताया ऋत्सर्ग कुर्वन्ति, केचित् पुनश्चातुर्मासिके पापादेवताया अपि कायो- VIसर्ग कुर्वन्ति, प्रभाते चावश्यके कृते पाकल्याणकं गृहन्ति, पूर्वगृहीतांश्चाभिग्रहान् निवेदयन्ति, अभिप्रहा यदि पुनः सम्पम् नानुपालितास्तदा कूजितक रायिततयोत्सर्गन्ति , पुनरपि अन्यान् गृहन्ति, निरभिमहर्न वर्त्तते स्थातुं, सांवत्सरिके चावपके रुते प्रदोपे पर्युषणाकपः कन्यते, स पुनः पूर्वमेवानागते पञ्चरात्रे कथ्यते च, एषा सामाचारीति । arorary.om पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यक मूलं एवं हरिभद्रसूरि-रचिता वृत्ति: ~277
SR No.035031
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 31 Aavashyak Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size90 MB
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