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________________ आगम [भाग-३१] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१/४ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) अध्ययन [४], मूलं [सू.] / [गाथा-], नियुक्ति: [१३१२] भाष्यं [२१२...', (४०) 4%A प्रत सूत्रांक [सू.] जहा जलंताइ(त) कढ़ाई, उयेहा: न चिरंजले । घटिया घट्टिया झत्ति, तम्हा सहह घट्टणं ॥१३१२ ॥ सुचिरंपि वकुटाई होहिंति अणुपमजमाणाई । करमदिदारुयाई गर्यकुसागारवेंटाई॥१३१३॥ . KI इदमपि गाथाद्वयं कण्ठयमेव, ताणं सपाण दवविउस्सग्गो, जं रजाणि उझियाणि, भावविउस्सग्गो कोहादीणं, विउ-13 |स्सग्गेत्ति गयं २५, इयाणिं अप्पमाएत्ति, ण पमाओ अप्पमाओ, तत्थोदाहरणगाहा रायगिहमगहसुंदरि मगहसिरी पउमसत्थपक्खेवो। परिहरियअप्पमत्ता नहूँ गीय नवि य चुका ॥ १३१४ ॥10 | इमीए वक्खाण-रायगिहे णयरे जरासंधो राया, तस्स सबप्पहाणाओ दो गणियाओ-मगहसुंदरी मगहसिरी य, मग-15 हासिरी चिंतेइ-जइ एस न होजा ता मम अन्नो माणं न खंडेजा, राया य करयलत्यो होजत्ति, सा य तीसे छिद्दाणि | मग्गइ, ताहे मगहासिरी नदिवसंमि कणियारेसु सोवनियाओ संवलियाओ विसधूवियाओ सूचीओ केसरसरिसियाओ (खित्ताओ, ताओ पुण तीसे मगहसुंदरीए मयहरियाए अहियाओ, कह भमरा कणियाराणि न अल्लियंति चूएस निलंति ?, दीप अनुक्रम [२६] AREESee More १ तेषां सर्वेषां हयग्युसर्गः, यत् राज्यान्युमितानि, भावध्युत्सर्गः क्रोधादीनां । पुत्सर्ग इति गतं, इदानीमप्रमाद इति, न प्रमादोभमाद, बनो। दाहरणगाथा । अस्या व्याख्यान-राजगृहे नगरे जरासन्धो राजा, तस्य सर्वप्रधाने वे गणिके-मगधसुन्दरी मगधीन, मगधनीचिन्तयति, यषा न भवन सदा मम नान्यो मार्न खण्डवेन् , राजा च करतलस्थो भवेदिति, सा प तस्यामिहाणि मार्गयति, तदा मगधनीखदिवसे कर्णिकारेषु सावणिका मञ्जयः विषकार सिताः सूचयः केशरसदशाः क्षेपितवती, ताः पुनमस्या मगधसुन्दा महत्तरिकया ज्ञाताः, क श्रमराः कर्णिकारेषु नागच्छन्ति ? चूतेषु गम्ति ~131
SR No.035031
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 31 Aavashyak Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size90 MB
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