SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 178
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्तिः ) वक्षस्कार [७],------------------- --------------------- मूलं [१४२-१४५] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१४२-१४५] वक्षस्कारे श्रीजम्मू- स्तावत्प्रमाणषट्पञ्चाशदूभागप्रमाणमित्यर्थः, तत्रिगुणं सविशेष-साधिकं परिक्षेपेण करणरीत्या द्वे योजने पश्चपश्चा-181 प्रथमादिद्वीपशा- शद्भागाः साधिका इत्यर्थः, अष्टाविंशतिमेकपष्टिभागान् योजनस्य वाहल्येन । अथ मन्दरमधिकृत्य प्रथमादिम-18 मण्डलान्तिचन्द्री-18 ण्डलाबाधाप्रश्नमाह बाधाम. या वृत्तिः १४६ 11४६६॥ जम्बुद्दीवे दीवे मन्दरस्स पव्वयस्स केवइआए आवाहाए सबभंतरए चन्दमंडले पण्णत्ते?, गोअमा! चोआलीस जोअणसहस्साइं अह य बीसे जोअणसए अबाहाए सम्बन्भन्तरे चन्दमंडले पण्णत्ते, जम्बुद्दीवे.२ मन्दरस्स पव्ययस्स केवइयाए अबाहाए अभंतराणन्तरे चन्दमंडले पण्णते?, गो०! चोआलीसं जोअणसहस्साई अट्ट व छप्पण्णे जोअणसए पणवीसं च एगसद्विभाए जोभणस्स एगद्विभार्ग च सत्तहा छेत्ता चत्तारि चुण्णिाभाए अबाहाए अभंवराणन्तरे चन्दमंडले पण्णत्ते, जम्बुद्दीचे दीये मन्दरस्स पव्ययस्स केवइआए अबाहाए अभंतरतचे मंडले पं०?, गो०! चोआलीसं जोअणसहस्साई भट्ट य वाणउए जोभणसए एगावण्णं च एगसहिभाए जोमणस्स एगट्ठिभागं च सत्तहा छेता एगं चुण्णिाभाग अबाहाए अभंतरसचे मैडले पणते, एवं' खल एएणं उपाएणं णिक्खममाणे चंदे तयाणन्तरामो मंडलाओ तयाणम्तर मंडल संफममाणे २ छत्तीस छत्तीस जोभणाई पण S वीसं चं एगद्विभाए जोअणस्स एगद्विभागं च सत्तहा छेत्ता चत्तारि चुण्णिाभाए एगमेगे मंडले अवाहाए बुद्धि अभिवद्धेमाणे ४६६॥ २ सम्बबाहिर मंडलं उबसंकमित्ता चार चरइ । जम्बुद्दीवे दीवे मन्दरस्स पचयरस केवइआए अवाहाए सव्वबाहिरे चंदमंडले पं०१, पणयालीसं जोमणसहस्साई तिणि अ तीसे जोअणसए अबाहाए सम्बबाहिरए चंदमंडले ५०, जम्बुरीवे दीवे मन्दरस्स दीप अनुक्रम [२६९-२७२] ~178~
SR No.035025
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 25 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages344
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size80 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy