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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्ति:) वक्षस्कार [३], ------------------------ ------ मूलं [१२] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [२] टीप बद्धः-उपसम्पन्नैर्नाटकैः प्रतीतैर्बरतरुणीभिः-सुभगाभिः स्त्रीभिः भूभुजंगरागेषु परममोहनत्वेन तासामेवोपयोगात्, | सम्प्रयुक्तैः-प्रारम्धैरुपनृत्यमानो-नृत्यविषयीक्रियमाणस्तदभिनयपुरस्सरं नर्तनात् , उपगीयमानस्तद्गुणगानात् , उपल भ्यमानस्तदीप्सितार्थसम्पादनात्, महता इति विशेषणं प्राग्वत् इष्टान्-इच्छाविषयीकृतान् शब्दस्पर्शरसरूपगन्धान । | पञ्चविधान मानुष्यकान्-मनुष्यसम्बन्धिनः कामभोगान-कामांश्च भोगांश्च इति प्राप्तसंज्ञकान , तत्र शब्दरूपे कामौ| स्पर्शरसगन्धा भोगा इति समयपरिभाषा, भुञ्जान:-अनुभवन् विहरतीति । अथ तमिम्रागुहाद्वारोद्घाटनायोपक्रमते । तए गं से भरहे राया अण्णया कयाई सुसेणं सेणावई सद्दावेइ २ ता एवं वयासी गच्छ णं खिप्पामेव भो देवाणुप्पिा ! तिमिसगुहाए बाहिणिलस्स दुवारस्स कबाडे विहाडेहि २ सा मम एमाणत्ति पञ्चप्पिणाहित्ति, तए णं से मुसेणे सेणाबई भरहेणं र. ण्णा एवं चुत्ते समाणे हद्दतुट्ठचित्तमाणदिए जाव करवळपरिग्गहि सिरसावतं मत्थए अंजलि कहु जाप पडिसुणेइ २ सा भरहस्स रपणो अंतियाओ पडिणिक्खमइ २ चा जेणेव सए आवासे जेणेव पोसहसाला तेणेव उवागच्छइ २ त्ता ब्भसंधारगं संथरइ जाव कयमालस्स देवस्स अट्ठमभत्तं 'पगिण्हन पोसहसालाए पोसहिए बंभयारी आव अहमभसि परिणममाणसि पोसइसालामी पडिणिक्खमह २त्ता जेणेव माणघरे तेणेव उवागच्छद्र २त्ता पहाए फयवलिकम्मे कयकोउअमंगलपायच्छिते सद्धप्पाचेसाई मंगलाई वत्थाई पबर परिहिए अप्पमहन्याभरणालंकियसरीरे धूवपुप्फगंधमहत्थगए मजणघराओ पंडिणिक्खमइ २ त्ता जेणेम तिमिसगुहाए दाहिणिलास्स हुमारस्स कवाडा तेणेव पहारेत्थ गमणाए, तए णं तस्स सुसैणस्स सेणावइस्स बहवे राईस अनुक्रम [७६] अथ तमिसागुफ़ाया: द्वरोद्घाटनस्य वर्णनं -- ~98~
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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