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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्तिः ) वक्षस्कार [४], ------------------------------------------------------ मलं [९०] + गाथा: पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: प्रत | वक्षस्कारे सूत्रांक [१०] श्रीजम्बू-18 द्वीपशान्तिचन्द्रीया वृत्तिः ॥३३॥ स.९० E अ० गाथा: आयामेणं अद्धकोसं विक्खम्भेणं देसूर्ण कोसं उद्धं पच्चत्तेणं वण्णओ सीहासणा सपरिवारा, एवं सेसासु विदिसामु, गाहा-पउमा परमप्पभा चेब, कुमुदा कुमुदष्पहा । उप्पलगुम्मा णलिणा, उप्पला उप्पलुज्जला ॥ १ ॥ भिंगा भिग्गप्पभा घेव, भंजणा कजलप्पभा । सिरिकता सिरिमहिमा, सिरिचंदा चेव सिरिनिलया ।। २ ॥ जम्बूए णं पुरथिमिलस्स भवणस्स उत्तरेणं सत्तरपुरस्थि नमिल्लस्स पासायवडेंसगस्स दक्खिणेणं एत्व णे कूडे पण्णते अढ जोमणाई उद्धं प्रा.. प्रा. उच्चत्तेणं दो जोअणाई उज्वेहेणं मूले अट्ठ जोगणाई आवामविक्खम्भेणं बहुमझदे सभाए छ जोषणाई आयामविक्खम्भेणं उवरिं चत्तारि जोषणाई आयामविक्सम्भेण-पणवीसहारस बारसेव मूले अमज्झि उवरि च । सविसेसाई परिरओ कूडस्स इमस्स बोद्धव्यो ॥ १॥ मूले विच्छिण्णे मझे संखिचे उबर तणुए सबकणगामए अच्छे बेइआवणसंडवण्णओ, एवं सेसावि कूड़ा इति । जम्बूए णं सुर्वसणाए दुवालस णामधेजा पं०, तं०-सुदंसणा १ अमोहा २ य, सुप्पबुद्धा ३ असोहरा ४ । विदेहजम्बू ५ सोमणसा ६, णिअया ७ णिचमंडिआ ८ ०० ... |॥१॥ सुभदा य ९ विसाला य १०, सुजाया ११ सुमणा १२ विआ । ole ____ सुदंसणाए जम्बए, णामधेचा दुवालस ॥२॥ जम्बूए णं अट्ठमंगलगा, उत्तर 2 FORom दक्षिण दीप अनुक्रम [१५१-१६२] . ॥३३॥ ~317~
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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