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________________ आगम (१६) सूर्यप्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) प्राभूत [३], -------------------- प्राभृतप्राभृत -], ------------- ---- मूलं [२४] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [१६]उपांगसूत्र- [५] “सूर्यप्रज्ञप्ति मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: प्रत सुत्रांक [२४] उज्जोति तवेंति पगासेंति, एगे एवमासु ता तिणि दीवे तिणि समुद्दे चंदिमसूरिया ओमासंति०, एगेर प्राभृतम् तिवृत्तिः एवमासु २, एगे पुण एवमासुता अद्धचउत्थे दीवसमुद्दे चंदिमसूरिया ओभासंति उज्जोति तवेंति पगासिंति मल०) एगेएवमाहंसु ३, एगे पुण एवमाहंसु ता सत्त दीचे सत्त समुद्दे चंदिमसूरिया ओभासिति ४ एगे एव माहंसु ४,५ एगे पुण एवमासु ता दस दीवे दस समुद्दे चंदिमसूरिया ओभासंति ४, एगे एवमाइंसु ५, एगे पुण एवंमा६३॥ सु, ता बारस दीवे वारस समुद्दे चंदिमसूरिया ओभासंति ४, एगे एवमासु ६, एगे पुण एवमाहंसु, पायालीसा हीदीवे यायालीसं समुद्दे दिमसूरिया ओभासंति पक(४),एगे एवमाहंसु ७, एगे पुण एवमाहंसु बावत्तरिंदीवे वावत्तरि समुदे दिमसूरिया ओभासंति, एक(४),एगे एवमाईसु८, एगे पुण एवमाहंसु तापातालीसं दीवसतं बायालं समुद्दसतं चंदिमसूरिया ओभासंति४ एगे एवमाहंसु ९, एगे पुण एबमाहंसु, ता बावसरि समुहसतं चंदिमसूरिया ओभासंतिक(४)एगे एबमासु१०, एगे पुण एवमाहंसुताचायालीसं दीवसहस्सं वायालं समुद-15 संहस्सं चंदिमसूरिया ओभासंति, पक(४), एगे, एवमाहंस ११, एगे पुण एवमाहंसुतावावसरं दीवसहस्सं वायत्तरं समुदसहस्सं चंदिमसूरिया ओभासंति पक (४) एगे एवमासु १२, वयं पुण एवं बदामो-अयपणं जंबुडीवे सबदीवसमुहाणं जाव परिक्खेवेणं पण्णसे, सेणं एगाए जगतीए सपतो समंता संपरिक्खिसे, सा गं जगती ॥१३॥ तहेच जहा जंबुद्दीवपन्नत्तीए जाव एवामेव सपुवावरेणं जंबुद्दीवे २ चोइस सलिलासयसहस्सा छप्पन्नं च सलिलासहस्सा भवन्तीति मक्खाता, जंबुद्दीवेणं दीवे पंचचकभागसंठिता आहितातिवदेज्जा, ता कहं CITO अनुक्रम [३४] weredturary.com ~136~
SR No.035021
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 21 Sooryapragyapti Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages610
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_suryapragnapti
File Size132 MB
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