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________________ आगम (१५) “प्रज्ञापना” – उपांगसूत्र-४ (मूलं+वृत्ति:) पदं [२६], -------------- उद्देशक: -,------------- दारं --------------- मूलं [३०१] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१५]उपांगसूत्र-[४] "प्रज्ञापना" मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: अथ षविंशतितमं कर्मवेदबन्धाख्यं पदं ॥ २६ ॥ प्रत सूत्रांक [३०१] दीप अधुना षड्विंशतितममारभ्ये, तत्र चेदमादिसूत्रम्कति णं भंते ! कम्मपगडीओ पण्णताओ, गो० । अट्ट कम्मपगडीओ पण्णचाओ, तं०-णाणा. जाव अंतराइयं, एवं नेरइयाणं जाव वेमाणियाण, जीवे णं भंते ! गाणावरणिज्ज कम्मं वेदेमाणे कति कम्मपगडीओ बंधति ?, गो०! सत्तविहवंधए वा अद्वविहबंधए वा छबिहबंधए वा एगविहबंधए वा, नेरइएवं भंते ! णाणावरणिज्ज कम्मं वेदेमाणे कति कम्म बंधति , गो०। सत्तविहबंधए वा अढवि०, एवं जाव वेमाणिते, एवं मणसे जहा जीवे, जीवाणं भंते ! णाणावरणिअंकम्म वेदेमाणा कति० कम्मपगडीतो बंधति, गो! सबेवि ताव होआ सत्तविहबंधगा य अट्टविह०१ अहवा सत्तविहबंधगा य अट्टविहबंधगा य छविबंधगे य २ अहवा सत्तविहबंधगा य अट्टविहबंधगा य छविबंधगा य ३ अहवा सत्तविहबंधगा य अविहबंधगा य एगविहबंधए य ४ अहवा सत्तविहबंधगा य अडविहबंधगा य एगविहवंधगा य ५ अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठवि० छविहबंधए य एगविहबंधए य ६ अहवा सचविहवंधगा य अडवि० छविहबंधए य एगविहबंधगा य ७ अहवा सत्तविहबंधगा य अढवि. छबिह० एगविहबंधए य ८, अहवा सत्तविहबंधगा य अढ० POSsse2029292920201008 अनुक्रम [५४८] FarPranaamsamunoonm अथ पद (२६) "कर्मवेदबन्ध" आरब्धम ~96~
SR No.035020
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 20 Pragyapana Mool evam Vrutti Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pragyapana
File Size71 MB
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