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________________ आगम भाग-१४ "विपाकश्रुत" - अंगसूत्र-११ (मूलं+वृत्तिः ) श्रुतस्कंध: [१], ---------------------- अध्ययन [६] ---------------------- मूलं [२६] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[११], अंगसूत्र-[११] विपाकश्रुत" मूलं एवं अभयदेवसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [२६] नगरे होत्था रिद्ध०, तत्व णं सीहपुरे नयरे सीहरहे नाम राया होत्था, तस्स णं सीहरहस्स रन्नो दुजोहणे | नामे चारगपालए होत्था अहम्मिए जाच दुप्पडियाणंदे, तस्स णं दुजोहणस्स चारगपालगस्स इमेयारूवे चारगभंडे होत्था बहवे अयकुंडीओ अप्पेगइयाओ तंबभरियाओ अप्पेगड्याओ तउयभरियाओ अप्पेग. सीसगभरियाओ अप्पेग० कलकल भरियाओ अप्पेग खारतेल्लभरियाओ अगणिकायंसि अद्दहिया चिट्ठति, तस्स णं दुजोहण चारग० चहवे उहियाओ आसमुत्तमरियाओ अप्पेग० हत्यिमुत्तभरिआओ अप्पेग. गोमुत्तभरियाओ अप्पेग० महिसमुत्तभरियाओ अप्पेग० उद्दमुत्तभरियाओ अप्पेग० अयमुत्सभरियाओ अप्पेग० एलमुत्तभरियाओ बहुपडिपुनाओ चिट्ठति। तस्स णं दुजोहण चारगपालगस्स. बहवे हत्धुंडयाण य पायंदुयाण य हडीण य नियलाण य संकलाण य पुंजा निगरा य सन्निक्खित्ता चिट्ठति, तस्स णं दुजोहण चारग. स्स बहवे वेणुलयाण य वेत्तलयाण य चिञ्चालयाण य छियाणं कसाण य वायरासीण य पुंजा णिगरा दीप अनुक्रम १'चारगपाले'त्ति गुप्तिपालकः । २ 'चारगभंडे'त्ति गुस्युपकरणम् । ३ 'हत्धुंडुयाण त्ति अण्डूनि-काष्ठादिमयवन्धनविशेषाः, | एवं पादान्दुकान्यपि, 'हडीण यत्ति हडया-बोटकाः 'पुंजति सशिखरो राशिः 'निगर'त्ति राशिमात्रम् । ४ 'वेणुलयाण योति | स्थूलवंशलतानां 'वेत्तलयाण यत्ति जलजवंशलतानां 'चिंच'त्ति विश्वालतानाम् अम्बिलिकाकम्बानां 'छियाण'त्ति लक्ष्णचर्मकशानां 'कसाण यति चर्मयष्टिकानां 'वायरासीण'ति बल्करश्मयो बटादित्वगमयसिंदुराणि नादनप्रयोजनानि तेषां पुजास्तिष्ठन्तीति योगः। [२९) अनु.१४ | नन्दिवर्धनस्य पूर्वभव: ~87~
SR No.035014
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 14 Vipakshrut and Auppatik Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_vipakshrut
File Size81 MB
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