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________________ आगम भाग-१४ "विपाकश्रुत" - अंगसूत्र-११ (मूलं+वृत्तिः ) श्रुतस्कंध: [१], ----------------------- अध्य यनं [३] ----------- --------- मूलं [१७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[११], अंगसूत्र-[११] विपाकश्रुत" मूलं एवं अभयदेवसूरिरचिता वृत्ति: अभग्नसेनाध्य. पूर्वभवः सू० १७ ॥५८॥ प्रत सूत्रांक [१७]] विपाके जापत्थियापिडए गेहंति, पुरिमतालस्सणगरस्स परिपेरतेसु बहवे काइअंडए य घूघूअंडए य पारेवइ टिटिभि श्रुत०१६डए य खग्गिअ०मैयूरि कुकुडिअंडए य अण्णसिं च पाहणं जलयरथलयरखयरमाईणं अंडाइं गेहंति गेण्हेत्ता पत्थियपिडगाई भरेति जेणेव निन्नयए अंडवाणियए तेणामेव उवागच्छद २ निन्नयगस्स अंडवाणियस्स उजवणेति, तते णं से तस्स निन्नयस्स अंडवाणियस्स बहवे पुरिसा दिण्णभतिक बहवे काइअंडए य जाव कु-18 कुडिअंडए य अन्नेसिं च बाहूर्ण जलयरथलयरखहयरमाईणं अंडयए तेवएसु य कवल्लीसु य कंडुएस यम-18 जणएसु य इंगालेसु य तलिंति भज्जेति सोल्लिंति तलेता भजंता सोल्लेता रायमग्गे अंतरावणसि अंडयएहि । य पणिगएणं वित्ति कप्पेमाणा विहरति, अप्पणावि य णं से निन्नयए अंडवाणियए तेहिं बहहिं काइयअंडएहि य जाय कुकुडिअंडएहि य सोल्लेहि य तलिएहि य भजेहि य सुरं च आसाएमाणे विसाएमाणे दीप अनुक्रम - १ 'पथिकापिटकानि च वंशमयभाजनविशेषाः, काकी घूकी टिटिभी बकी मयूरी कुर्कुटी च प्रसिद्धा, अण्डकानि च प्रतीतान्येवेति। २ 'तवएसु यति तवकानि-सुकुमारिकादितलनभाजनानि 'कवल्लीसु यत्ति कषल्यो-गुढादिपाकभाजनानि 'कंडसु'त्ति क-16 न्दवो-मण्डकादिपचनभाजनानि, 'भज्जणएसु यत्ति भर्जनकानि कर्पराणि धानापाकभाजनानि, अकाराश्च प्रतीताः, 'तलिंति' अमो ४ लेहेन, भजन्ति-धानावत्पचन्ति 'सोडिंति यत्ति ओदनमिव राध्यन्ति खण्डशो वा कुर्वन्ति 'अन्तरावर्णसि'त्ति राजमार्ममध्य-18॥५८॥ भागवर्चिहढे 'अंडयपणिएणति अण्डकपण्येन । ३ ५ 'सुरं 'त्यादि प्राग्वत् । [२०] CAT SAREauraton intimational ~62~
SR No.035014
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 14 Vipakshrut and Auppatik Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_vipakshrut
File Size81 MB
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