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________________ आगम (०३) [भाग-5] “स्थान" - अंगसूत्र-३ (मूलं+वृत्ति:) स्थान [४], उद्देशक [३], मूलं [३२०] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित....आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [०३] "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्ति: श्रीस्थानामसूत्र प्रत सूत्रांक स्थाना० | उद्देशः३ यानयुग्यसारथिमभृतिचतु. ॥३९॥ [३२० सू०३२० दीप १६, एवं रूवेण सीलेण ४, १७, स्वेण चरित्तेण ४, १८, चत्तारि पुरिसजाता पं० सं०-सुयसंपन्ने नाममेगे णो सीलसंपन्ने ४, १९, एवं सुतेण चरित्तेण य ४, २०, चचारि पुरिसजाता पं० सं०-सीलसंपन्ने नाममेगे नो चरितसंपन्ने ४, २१, एते एकवीसं भंगा भाणितब्वा, चत्तारि फला पं० तं०-आमलगमहुरे मुदितामहुरे खीरमहुरे खंडमहुरे, एवामेव पत्तारि आयरिया पं००-आमलगमहुरफलसमाणे जाव खंडमहुरफलसमाणे, चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-आतवेतावच्चकरे नाममेगे नो परवेतावच्चकरे ४, चत्तारि पुरिसजाता पं० सं०-फरेति नाममेगे वेयावश्च णो पडिच्छइ पडिच्छइ नाममेगे वेयावञ्चं नो करेइ ४, चत्तारि पुरिसजाता पं००-अट्ठकरे णाममेगे णो माणकरे माणकरे णाममेगे णो अट्ठकरे एगे अट्ठकरेवि माणकरेवि एगे जो अट्ठकरे जो माणकरे, पत्तारि पुरिसजाता पं००-बाणटुकरे णाममेगे णो माणकरे ४, चत्तारि पुरिसजाता पं० सं०-गणसंग्गहकरे णाममेगे णो माणकरे ४, चत्तारि पुरिसजाया पं० २०माणसोभकरे णाम एगे णो माणकरे ४, चत्तारि पुरिसजाया पं० सं० -माणसोहिकरे जामगेगे नो माणकरे ४, बचारि पुरिसजाया पं० २०-रुवं नाममेगे जहति नो धम्म धर्म नाममेगे जहति नो रूवं एगे रूबंपि जहति धम्मपि जहाति एगे नो रूवं जहति नो धर्म, चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-धम्म नाममेगे जहति नो गणसंठिति ४, चत्वारि पुरिसजाया पं० सं०-पियधम्मे नाममेगे नो वढधम्मे दधम्मे नाममेगे नो पितधम्मे एगे पियधम्मेवि दहधम्मेवि एगे नो पियधम्मे नो दधम्मे, चत्तारि आयरिया पं० सं०-पब्बायणायरिते नाममेगे णो उबट्ठावणायरिते उवट्ठावणायरिए णाममेगे जो पबायणायरिए एगे पब्वाय ॐ अनुक्रम [३४२] ॥२३९॥ ~488~
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
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