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________________ आगम (०३) प्रत सूत्रांक [७-१६] दीप अनुक्रम [6-14] [भाग-5] "स्थान" अंगसूत्र - ३ ( मूलं + वृत्तिः) स्थान [१], उद्देशक [-1, मूलं [१६] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ... आगमसूत्र - [०३], अंग सूत्र - [०३ ] श्रीस्थाना ङ्गसूत्रवृत्ति: ॥ १९ ॥ Education - जीवे' इत्यादि, अथवा उक्ताः सामान्यतः प्रस्तुतशास्त्रव्युत्पादनीया जीवादयो नव पदार्थाः, साम्प्रतं जीवपदार्थ विशे पेण प्ररूपयन्नाह - एगे जीने पाटिकरणं सरीरएणं ( सू० १७) एगा जीवाणं अपरिभाइत्ता विगुब्वणा (सू० १८) एगे मणे (सू०१९) एगा वई (सू०२०) एगे कायवायामे ( सू० २१ ) एगा उप्पा ( सु० २२) एगा वियती ( सू० २३) एगा वि. यचा ( सू० २४ ) एगा गती ( सू० २५) एगा आगती ( सू० २६) एंगे चयणे ( सू २७) एगे उनवाए (सू० २८) एगा तथा (सू० २९) एगा सन्ना ( सू० ३०) एगा मन्ना (सू० ३१) एगा विनू (सू० ३२ ) एगा वेयणा (सू० ३३) एगा छेयणा (सू० ३४) एगा भेषणा (सू० ३५) एगे मरणे अंतिमसारीरियाणं ( सू० ३६) एंगे संअहाए पत्ते (सू० ३७) एगदुक्खे जीवाणं एगभूए (सू० ३८) एगा अहम्मपडिमा जं से आया परिकिले सति ( सू० ३९) एगा धम्मपडिमा जं से आया पजबजाए (सू० ४०) एगे मणे देवासुरमनुयाणं वंसि तंसि समयंसि ( सू० ४१ ) एगे उडाणकम्मबळवीरियपुरिसकारपरकमे देवासुरमणुयाणं तंसि २ समयसि ( सू० ४२ ) एगे नाणे एगे दंसणे एगे चरिते (सू० ४३ ) 'एगे जीवे पाडिक्कएणं सरीरएणं' एकः केवलो जीवितवान् जीवति जीविष्यति चेति जीवः प्राणधारणधर्मा आत्मेत्यर्थः, एक जीवं प्रति गतं यच्छरीरं प्रत्येकशरीरनामकर्मोदयात् तत्प्रत्येकं तदेव प्रत्येककं, दीर्घत्वादि प्राकृतत्वात्, तेन प्रत्येककेन शीर्यत इति शरीरं देहः तदेवानुकम्पितादिधर्मोपेतं शरीरकं तेन लक्षितः तदाश्रित एको जीव इत्यर्थः, For Personal & Pre Use Only "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्तिः ~ 48~ १ स्थाना ध्ययने जीवपदा थें विशेषाः ॥ १९ ॥
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
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