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________________ आगम (०३) प्रत सूचांक [२३४] दीप अनुक्रम [२४८] [भाग-5] "स्थान" अंगसूत्र- ३ ( मूलं + वृत्तिः) स्थान [ ४ ], उद्देशक [1]. मूलं [ २३४ ] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित....आगमसूत्र - [ ०३], अंग सूत्र - [०३] "स्थान" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचित वृत्तिः - - विशेष सम्बन्धः - अनन्तराध्ययने विचित्रा जीवाजीवद्रव्यपर्याया उक्ता इहापि त एवोच्यन्ते इत्यनेन सम्बन्धेनायातयोगद्वार स्वानुदेशकादिमे Educatonintamannal चारि अंतकिरियातो पं० तं तत्थ खलु पढमा इमा अंतकिरिया - अप्पकम्मपचायाते यावि भवति, से णं मुंडे भविता अगारातो अणगारियं पव्वतिते संजमबहुले संवरबहुले समाहिबहुले हे तीरट्टी उवहाणवं दुक्खक्सवे तवस्सी तस्स णं णो तप्पगारे तवे भवति णो तहृप्पगारा वेयणा भवति तप्पगारे पुरिसज्जाते दीहेणं परितावेणं सिज्झति बुज्झति मुञ्चति परिणिब्वाति सम्वदुक्खाणमंत करेद, जहा से भरहे राया चाउरंतचकवट्टी, पडमा अंतकिरिया १, . अहावरा दोबा अंतकिरिया, महाकम्मे पञ्चाजाते यावि भवति, से णं मुंडे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्बतिते, संजमबहुले संवरबहुले जाव उवहाणवं दुक्खक्खवे तवस्सी, तस्स णं तपगारे तवे भवति तत्पगारा वेवणा भवति, तहपगारे पुरिसजाते निरुद्धेणं परिता तेणं सिज्झति जाव अंतं करेति जहा से गतस्माले अणगारे, दोचा अंतकिरिया २, अहावरा तथा अंतकिरिया, महाकम्मे पचायाते यावि भवति, से णं मुंडे भवित्ता अगारातो अणगारियं पव्वतिते, जहा दोघा, नवरं दीहेणं परितातेणं सिज्झति जाब सव्वदुक्खाणमंत करेति, जहा से सर्णकुमारे राया चारंतचकवट्टी तथा अंतकिरिया ३, अहावरा चउत्था अंतकिरिया अप्पकम्मपचायाते यावि भवति, से णं मुंडे भवित्ता जाव पव्वतिवे For Personal & Pre Use Only ~ 369~ www.january.o
SR No.035005
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 05 Sthan Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages594
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sthanang
File Size123 MB
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