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________________ १५ पाटणना राज्यकारभारमांथी जैन गृहस्थोनो हाथ निकलवा लाग्यो हतो, प्रसिद्ध पोरवाल वीर जैन मंत्री वस्तुपाल अने तेजपालना समयमां थोडाक वखतने माटे गुजरातनी झांखी पडेलो कीर्ति पाछी उज्ज्वल बनी हती. जो के अजयपालना बखतथी गुजरातनी राज्यसत्ता मंद थवा मांडी हती तो पण बाघेला चौलुक्य सारंगदेव पर्यन्त गुजरात देश अने तेना राजाओए पोतानुं महत्व ठोक ठीक टकावी राख्युं हनुं, पण छेला राजा करणवाघेलाना समयमां पाटण अने गुजरातना उपर हमेशाने माटे पराधीनतानो दंड पड्यो १ वनराजथी उगेल, सिद्धराज अने कुमारपालथी उन्नतिनी छेल्ली हदे पहोंचेल पाटणनी कीर्तिवल्ली करण वाघेलाना वखतमां सदाकालने माटे करमाई गई. आ प्रमाणे वनराज, भीमदेव, सिद्वराज, कुमारपाल जेवा युद्धवीरोना पराक्रमोथी, जांबक, चंपक, त्रिमल, शांतु, 9 पाटनी राजगादी उपर चौलुक्य अने एज वंशनी वाघेला शाखाना राजाओ नीचेना क्रम प्रमाणे थया छे: - वौलुक्य राजाओ :- १ मूलराज ( १ ) २ चामुंडराज ३ वल्लभराज दुर्लभराज ५ भीमदेव ( १ ) ६ कर्णदेव ( १ ) ( सिद्धराज ) ८ कुमारपाल ११ भीमदेव ( २ ) १२ त्रिभुवनपाल । वाघेला राजाओ- -१ धवल २ अर्णोराज ९ अजयपाल १० ५ वीसलदेव ६ अर्जुनदेव - ४ वीरधवल कर्णदेव | Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat ७ जयसिंहदेव मूलराज ( २ ) ३ लवगप्रसाद ७ सारंगदेव ८ www.umaragyanbhandar.com
SR No.034999
Book TitlePatan Chaitya Paripati
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKalyanvijay
PublisherHansvijayji Jain Free Library
Publication Year1926
Total Pages134
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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