SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 75
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ६६ लाभ होता है ? ' इस विषय को बड़ी खूबी से समझाया । फिर जुदे जुदे वक्ताओं के गायन एवं भाषण नीचे मुताबिक हुए । है दिन राजेन्द्र - जयन्ती का - आओ सज्जनमित्रो ! यह है, दिन राजेन्द्र - जयन्ती का | गाओ गुरुगुणगरिमा प्यारे !, दिन राजेन्द्र - जयन्ती का || (टेर ) जन्म दिवस का उत्सव उत्सुक, भक्त जहीन मनाते हैं, वे बहुविध गुणमाला गूंथी, चरणे मेट चढ़ाते हैं । साज - बाज से धूम-धाम से, गुरुगुण साज सजाते हैं, केशर - माता ऋषभ - तात का, जीवन सफल मनाते हैं ।। ( १ ) पारख गोत्र उपकेश वंशमणि, जन्म भरतपुर पाया है, गार्हस्थ्य धर्म व्रत में रह कुछ, काल सुवास विताया है । प्रमोदरि की वाणी सुन कर शुचि वैराग्य जगाया है, यतिधर्म की पहिनी कफनी, भविजन चित्त लुभाया है ॥ ( २ ) श्रीपूज्य बने पद पूजाये गुरु, देश विदेश गवाये हैं, धरणेन्द्रसूरि को नवकल में, स्वीकृत फिर करवाये हैं । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034961
Book TitleMeri Golwad Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherDevchandji Pukhrajji Sanghvi
Publication Year1944
Total Pages110
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy