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________________ orm or orar ॥ our or d ६८ वलाणा | १ | श्रीचन्द्रप्रभ ६९ कोशीलाव २. श्रीशान्तिनाथ] १ ७५/१५० श्रीपार्श्वनाथ ७० पावा श्रीशान्तिनाथ ७१ कवलां श्रीसंभवनाथ ७२ भूति महावीरप्रभु। श्रीऋषभदेव । ७३ वरदड़ो श्रीशान्तिनाथ। श्रीआदिनाथ । ७४ कवराड़ो श्रीचन्द्रप्रभ ७५ रोडलो श्रीआदिनाथ ७६ पिसावो १ श्रीचन्द्रप्रभ ७७ बाबागाँव १ श्रीसंभवनाथ ७८ दौलपुरा ७९ खिमाड़ो राणावतारो श्रेयांसनाथ ८० बाली' २ श्रीआदिनाथ। | श्रीपार्श्वनाथ ८१ सेसली दादापार्श्वनाथ | ८२ बोया श्रीशान्तिनाथ १ उदयपुर-महाराणा की महाराणी बालीकुंवरी के नाम से यह बसाया गया। यह भी किंवदन्ती प्रचलित है कि बाली नामक चोधरानीने सब से प्रथम यहाँ निवास किया इससे इसका नाम 'बाली' पड़ा । यहाँ सरकारी होस्पिटल, स्कूल, पाठशाला, कन्याशाला भी है। २ यहाँ विक्रम सं० ११८७ आषाढ़सुदि २ शनिवार के दिन संघवी-मांडणने सात लाख रुपया व्यय करके भव्य जिनालय बनवाया और उसकी भ० श्री आनन्दसूरिजी से प्रतिष्टा करवाई। पार्श्वनाथप्रतिमा के कारण ही यह सेसली नाम से प्रसिद्ध हुआ । मांडण ढालावत था, अतः प्रतिवर्ष इस मन्दिर पर उन्हींके वंशजों के तरफ से धजा चढ़ाई जाती है। ढालवतों के घर खिमेल आदि गाँवों में आबाद हैं। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com awn
SR No.034961
Book TitleMeri Golwad Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherDevchandji Pukhrajji Sanghvi
Publication Year1944
Total Pages110
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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