SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 60
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ उपसंहार ५६ का दिवाला निकल गया, सहृदयता और प्रेम ईर्ष्या और द्वेष में परिणत हो गया, विदेशी संस्कृति, विदेशी आचार-विचार, विदेशी वेश-भूषा यहाँ तक कि विदेशी भाषा का अधिपतित्व हमारे दिल और दिमागों पर छा गया। फल यह हुआ कि हमारा भारतीय समाज दिन पर दिन अधःपतन की ओर अग्रसर होता गया। आज हमारे समाज में कितनी विषमता फैल गई है ! जो भारत भूमि शस्य-श्यामला कही जाती थी, जो धन-धान्य से सदा परिपूर्ण रहती थी और जहाँ भिक्षुक लोग दरवाज़े से खाली हाथ लौटकर नहीं जाते थे, वहाँ आज अन्न और वस्त्र पैदा करनेवाले किसान और मजदूरों को भरपेट खाने को नसीब नहीं होता, उन की माँ-बहनों को तन ढकने को कपड़ा मयस्सर नहीं होता ! मशीनों और कल-कारखानों के इस युग में भारतीय जनता का जितना शोषण हुअा उतना भारत के इतिहास में आज तक कभी नहीं हुआ ! दिन भर जी-तोड़ परिश्रम करने के बाद भी हमारे मजदूर जो आज भूखे-नंगे रहते हैं, क्षय, दमा आदि भीषण रोगों से पीड़ित रहते हैं, उस का एकमात्र कारण है हमारी समाज की दूषित रचना । एक ओर माल की दर घटाने के लिये माल के जहाज़ के जहाज़ समुद्र में डुबो दिये जाते हैं, दूसरी ओर लोग दाने दाने से तरसते हैं ! आज ऐसी भीषण परिस्थिति हो गई है कि पर्याप्त अन्न और वस्त्र होते हुए भी हम उस का उपभोग नहीं कर सकते । एक ओर धनिक-कुबेरों के कोष भरते चले जा रहे हैं और दूसरी ओर प्रजा का शोषण होता चला जा रहा है। 'सोने' के बंगाल में लाखों माई के लाल भूख से तड़प तड़पकर मर गये, कितनी ही रमणियों ने वस्त्र के अभाव में लज्जा के कारण आत्महत्या कर डाली और कितनी ही भद्र रमणियों को पेट पालने के निमित्त वेश्यावृत्ति करने के लिये उतारू होना पड़ा, जिस के फलस्वरूप आज बंगाल में काले, गोरं और भूरे रंग के वर्णसंकर शिशुत्रों का जन्म हो रहा है ! इन सब का प्रधान कारण है हमारी परतंत्रता, हमारी गुटबन्दी, हमारी फूट, हमारी स्वार्थ-लिप्सा और चरित्रबल की हीनता । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034954
Book TitleMahavir Vardhaman
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJagdishchandra Jain
PublisherVishvavani Karyalay
Publication Year1945
Total Pages70
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy