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________________ हृदये तुमि मां भक्ति। तोमार भे प्रतिमा गडी मंदिरे मंदिरे । त्वंहि दुर्गा दश प्रहरण धारिणीम् ।। कमला कमल-दल विहारिणीम् । वाणी विद्या दायिनीम् नमामित्वाम् । ॐ नमामि कमलाम् अमलाम् अतुत्तास् । सुजलाम् सुफलाम् मातरम मातरम् । वन्दे ॥ श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम् । धरणीम् भरणीम् मातरम् । वन्दे मातरम् ॥ . राष्टीय प्रार्थना जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता । पञ्जाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड उत्कल बंगा ॥ विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तिरंगा । तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशीस मांगे । गाहे तव यश गाथा, जनगण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता । जय हे ! जय हे ! जय हे ! जय अय जय जय हे भारत भाग्य विधाता । जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता। प्रार्थना सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा । हम बुलबुले हैं उसकी वह गुलसितां हमारा ॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034946
Book TitleMahatma Jati ka Sankshipta Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorUnknown
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages120
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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