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________________ ( ४६ ) " संवत् १२४१ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १५ गुरौ दिने श्रीरणछोडजी प्रसादात्सूत्र० मंडनसुत हाजा, पुत्र तेजसी पुत्र कला कारापिते श्रीकोरटान गरे । 39 -- सं० १२४१ जेठसुदि १५ गुरुवार के दिन सूत्रधार ( सलावट - कडिया ) मंडन पुत्र हाजा, तत्पुत्र तेजसी के पुत्र कलाने यह मंदिर और रणछोड़ की मूर्त्ति कराई कोरटानगर में । " ७ - इनके अलावा ' बोकीवाव ' जिसका जल खारा है, तथा नदी के बीच में 'अलावटा' कुंड जिसका जल मीठा और हलका है अपने प्राचीन गौरव को अब तक स्मरण करा रहे हैं । ये जलाशय सदैव सजीवन रहते हैं और वारिश न होने पर भी इनका जल कभी खूटता नहीं है । ८- इसी प्रकार खेतलादेवल और बागेसर महादेवदेवल भी यहाँ की प्राचीनता का स्मरण करानेवाले हैं । वागेसर का देवल कोरटा से पूर्व में ३ माइल के फासले जबाँई नदी के बांये किनारे पर है और खेतलादेवल कोरटा गाँव Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034926
Book TitleKortaji Tirth ka Itihas Sachitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYatindravijay
PublisherSankalchand Kisnaji
Publication Year1930
Total Pages138
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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