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________________ ( २ ) १ मारवाडदेश की उत्कर्षता मारवाड यह शब्द मरुवार का अपभ्रंस है जिसको प्राचीन काल में मरुस्थान भी कहते थे । मरुस्थान से मिलते जुलते मरुदेश, मरुमंडल, मरुधर, और मारवाड शब्द भी हैं ! कुछ लोगों का अनुमान है कि जैसलमेर का संस्कृत नाम माड ' है और वाड़ की तरह उसके चारो तरफ मरुदेश होने से इसको मारवाड कहते हैं । यह राज्य राजपुताना के पश्चिमी भाग में है । इसके उत्तर बीकानेर, उत्तर-पूर्व में जयपुर का शेखावटी परगना, पूर्व में मेवाड़राज्य और अजमेर का मेरवाडा जिला, दक्षिण में सिरोही और पालनपुर, पश्चिम में कच्छ का रन और थरपाकर जिला और उत्तर-पश्चिम में जेसलमेर है । यह २४ अंश, ३७ कला और २७ अंश, ४२ कला उत्तरांश, तथा ३० अंश, ४ कला और ७५ अंश २२ कला पूर्व रेखांश के बीच फैला Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034926
Book TitleKortaji Tirth ka Itihas Sachitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYatindravijay
PublisherSankalchand Kisnaji
Publication Year1930
Total Pages138
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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