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________________ ३६ ] [जिनप्रभसूरि अने वच्चे आवेलां नगरोमां प्रभावना करता, पगले पगले संघोवडे सन्मान कराता अने अपूर्व देवगिरि तीर्थोने नमता सूरिजी अनुक्रमे देवगिरि (दोलताबाद)मा ( दोलताबाद) नगरे पहोंच्या. संघे प्रवेश महोत्सव को. संघ-पूजा थइ. संघपति जगसीह, साहण, मल्लदेव विगेरे संघ माथे पइट्टाण(प्रेतिष्ठान-पेठण )पुरमां जीवंतप्रतिष्ठान(पैठण) स्वामी मुनिसुव्रतनी प्रतिमानी यात्रा पुर-यात्रा करी. पछी आ तरफ दिल्लीमां विजयकटकमां जिनदेवमूरिए १ देवगिरि(दोलताबाद)मां सं. १३८३ का. शु. १३ ने दिवसे राजसीहना सुत शाह तिहुणसिंहे उपदेशमाला-लघुवृत्ति लखावी हती (जुओ पिटर्सन रि. ३, पृ. १३१ ). ए विगेरे जोतां विक्रमनी चौदमी सदीना उत्तगर्धमां आ नगरमा श्रीमान् जैनो वसता होई आ नगर व्यापारादिद्वारा सुसमृद्ध अने उन्नत स्थितिमा हतुं-तेम जणाय छे. अन्यत्र मळता इतिहास परथी जणाय छे के-आ महम्मद तघलक पातशाहे आ देवगिरिने पोतानी राजधानी बनाववा दौलतथी आबाद (दोलताबाद) बनाव्युं हतुं. २ जिनप्रभसूरिना तीर्थकल्पमां प्रतिष्ठानपत्तननो पण कल्प छे, ए उपर सूचित थइ गयुं छे. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034907
Book TitleJinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalchandra Bhagwan Gandhi
PublisherJinharisagarsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages204
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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