SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 162
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ सुलतान महम्मद.] विशेष परिचय [१५१ घणो गोळ एकठो थइ गयो. तेनुं मध करवा माटे सेवकोने जणाव्युं. त्यारपछी मद्य( दारु) करावीने वेचाववा लाग्या. लोकमां मद्य करनारा तरीके विख्यात थया. तेमांथी केटलाके गुरुना उपदेशथी मद्यनो वेपार तज्यो अने केटलाफ ते तजवामां अशक्त बनी ते ज वेपार करता रह्या. त्यारपछी जिनप्रभसूरिए पद्मावतीना उपदेशथी जंगलगोत्रवाळाने प्रतिबोधित कर्या." जिनप्रभसूरिए कनाणयनयर( कन्नानूर )-कल्पमा अने विद्यातिलक मुनिए तेना परिशेषमा सूचवतां अवशिष्ट रहेल जिनप्रभसूरिना ऐतिहासिक परिचयनी पूर्ति, तेमना ज कोइ ( अज्ञात ) निकटना अनुयायीए रचेला जणाता आ प्राकृत प्रबन्धथी थएली जणाशे. पाछळना केटलाक लेखकोए जिनप्रभसूरिनो संबंध, पीरोजशाह(फीरूज तुघलक) साथे जोज्यो छे, परंतु उपर्युक्त कल्प, परिशेष अने आ प्रबन्धना आधारे महम्मद तघलक साथे सम्बन्ध मानवो विशेष प्रामाणिक जणाय छे. विशेषमां जिनप्रभसूरिनां तत्कालीन गुण-वर्णनात्मक [स्वागत] गीतो बाकानेरना जैन पुस्तक-भंडारोमांथी उत्साही श्रीमान् अगरचंदजी, भंवरलालजी अने शंकरदानजी नाहटा बंधुओना प्रयत्नथी हालमां प्रकट थयां छे* तेमां पण कमाणयनयर * ऐतिहासिक जैनकाव्य-संग्रह (अभय जैन ग्रंथ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034907
Book TitleJinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalchandra Bhagwan Gandhi
PublisherJinharisagarsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages204
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy