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________________ namar २] [जिनप्रभसूरि अने र्यनो ऐतिहासिक प्रामाणिक परिचय कराववा कईक यत्न करूं छं. आ प्रयत्नथी, महम्मद तघलक संबंधी अन्यत्र जाणवामां न आवेली-प्रकाशित अतिहासिक पुस्तकोमा वांचवामां नहि आवेली; छतां तेना समकालीन परिचित विद्वान् जैन लेखकोए प्राकृतभाषामां लखी राखेली ऐतिहासिक घटना प्रकाशमां आवशे के जे पुरातत्त्वप्रेमी इतिहास-रसिक जिज्ञासु पाठकोने आनन्दप्रद थशे तेम धारूं छु. ___ जैनाचार्य हीरविजयसरि तथा जिनचंद्रसूरि (सपरिवार) अने सम्राट अकब्बरनी इतिहासप्रसिद्ध विशिष्ट समागमवाळी संतोषकारक सफळ घटना पहेलां लगभग अढीसो वर्ष पर थयेल चिरस्मरणीय आ ऐतिहासिक वृत्तान्त हालमां प्रकाशमां आवे छे एमां पण कुदरतनो कंइक संकेत हशे. जैन ज्योतिर्धरोना झळहळता तेजने न सहन करी शकनारा, ए महाविभूतियोने यथार्थ रूपमां न ओळखी शकनारा, अथवा ओळखवा छतां गमे ते अव्यक्त तुच्छ कारणे ए सत्पुरुषोने विकृत रूपमां आलेखनारा, ए विशिष्ट उच्च ज्योतिर्घरो सामे जाण्ये-अजाण्ये रज उडाडी तेमने झांखा पाडवानी उपहासयोग्य स्वभाव-सुलभ व्यर्थ चेष्टा करे ए स्वाभाविकबनवा योग्य छे, परंतु आपणे तो एमांथी पण प्रेरणानो बोधपाठ मेळवी. प्रमादनो परित्याग करी,आपणी तन-मन-धनादिक शक्तियोनो क्षुद्र कलहादिमां दुर्व्यय न करता, जीवननी अमूल्य Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034907
Book TitleJinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalchandra Bhagwan Gandhi
PublisherJinharisagarsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages204
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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