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________________ ( ६१ ) वह अपने आप छूटकर नदीमें जापड़ा और मिला नहीं | इसलिये यह अतिशयक्षेत्र है और यहां प्रतिवर्ष माघ में मेला होता है । श्रीक्षेत्र कुण्डल I सितारा जिले की औंध - रियासत में यह क्षेत्र है । कुण्डल स्टेशन ( M. S. M. Ry ) से सिर्फ दो मील है । गांव में एक पुराना दि० जैन मंदिर पार्श्वनाथजी का है । गांव के पास पहाड़ पर दो मन्दिर और हैं (१) झरी पार्श्वनाथ मंदिर - इसमें पार्श्वप्रतिमा पर अधिक जलबुष्टि होती है, इसलिये 'झरीपार्श्वनाथ' कहते हैं; (२) गिरीपार्श्वनाथ मंदिर है । कहते हैं कि पहले यहां के इराएगा गुफा मंदिर में भ० महावीर की मूर्ति थी । श्रावण मास में यहाँ यात्रा होती है । श्रीक्षेत्र कुम्भोज यह क्षेत्र कोल्हापुर स्टेट में हातकलंगड़ा स्टेशन से ४ मील है । गांव में एक मंदिर है । पर्वत पर पांच दि० जैन मंदिर 1 I प्राचीन हैं । श्री बाहुबलि स्वामी की चरण पादुकायें हैं। इस क्षेत्रका माहात्म्य अज्ञात है । श्रीक्षेत्र कुलपाक निजाम स्टेट में अलेर स्टेशन ( Bezwada Line ) से करीब ४ मोल कुलपाक प्राचीन क्षेत्र है; जिसका सम्बन्ध श्री Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034882
Book TitleJain Tirth aur Unki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherDigambar Jain Parishad Publishing House
Publication Year1946
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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