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________________ ( ८४ ) संवत् १६३२ में यहाँ के मंदिरों का जीर्णोद्धार सेठ हरिभाई देवकरणजी ने ईडर के भट्टारक कनककीर्तिजी से कराया था । ' यहाँ पर ब्रह्मचर्याश्रम दर्शनीय है। वहां से वापस शोलापुर आवे 1 शोलापुर से मनमाड जंकशन जाते हुये मार्ग में बादामी स्टेशन पड़ता है । बादामी - गुफामंदिर स्टेशन से बादामी गांव || मील दूर है । दक्षिणवाली पहाड़ी पर हिन्दू मंदिरों के अतिरिक्त दि० जैनियों का एक गुफा - मंदिर ( नं० ५ ) है । यह गुफा मंदिर सबसे ऊंचा है और इसमें चार दालान हैं । पहले दालान में जिनेन्द्रदेव की एक पद्मासन मूर्ति सिंहासनाधिष्ठित हैं। दूसरे दालान में चौवीसी प्रतिमा और पार्श्वनाथजी की प्रतिमायें मुख्य हैं। तीसरे दालान में श्री बाहुबलि - स्वामी की करीब ७ फीट ऊंची प्रतिमा दर्शनीय है । उसी के सन्मुख श्री पार्श्वनाथ स्वामी की प्रतिमा ७ फीट ऊंची कायोत्सर्ग विराजमान है । मलप्रभानदी के किनारे कई जिनमंदिर बने हुये हैं। बादामी पश्चिमी चालुक्यराजाओं की राजधानी थी, जिनमें से कई राजा जैनी थे । उन्होंने ही यह जिनमंदिर बनवाये थे । यहां से मनमाड जं० जावे। इस मार्ग में बीजापुर भी पड़ता है । बीजापुर बीजापुर एक प्राचीन स्थान है; जहाँ पर दि० जैनियों के Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034882
Book TitleJain Tirth aur Unki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherDigambar Jain Parishad Publishing House
Publication Year1946
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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