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________________ ( ३१ ) प्रश्नावली (१) तीर्थयात्रा के लाभ विस्तार के साथ लिखो । (२) सामाजिक उन्नति करने और स्वदेश गौरव बढ़ाने में तीर्थ - यात्रा किस प्रकार सहायता करती है ? (३) भारतवर्ष और जैनधर्म के इतिहास की क्या-क्या सामग्री जैन तीर्थों से उपलब्ध होती है ? ४. तीर्थों का सामान्य परिचय और यात्रा | वही जिह्वा पवित्र है । जिससे जिनेन्द्र का नाम लिया जावे और पगों को पाने की सार्थकता तभी है जब पुण्यशाली तीर्थों की यात्रा - चन्दना की जावे । आइये पाठक हम लोग दिल्ली से अपनी परोक्ष तीर्थयात्रा प्रारम्भ करें और प्रत्येक तीर्थ और मार्ग के दर्शनीय स्थानों का परिचय प्राप्त करें । दिल्ली दिल्ली भारत की राजधानी श्राज नहीं, बहुत पुराने जमाने से है। पाण्डवों के जमाने में वह इन्द्रप्रस्थ कहलाती थी । मुसलमानों ने उसे भारत की, दिहली नाम से प्रसिद्ध किया । शाहजहाँ ने उसका नाम जहानाबाद रक्खा | बोलचाल में सब लोग उसे दिल्ली कहते हैं । जैनधर्म का उससे घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034882
Book TitleJain Tirth aur Unki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherDigambar Jain Parishad Publishing House
Publication Year1946
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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