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________________ ( १३८ ) देवगढ़, चदेरी, पपौरा अहार कुडलपुर अतिशयक्षेत्र, कम्पिला, सोनागिरि और महावीरजी अतिशयक्षेत्र कहां हैं ? उनका संक्षिप्त परिचय लिखो । (६) जैनसाहित्य के प्रचार में जयपुर के विद्वान् पंडितों ने जो भाग लिया उसका हाल संक्षेप में लिखो। (१०) 'तीर्थक्षेत्र कमेटी'-शिलालेख-मानस्तंभ और भट्टारक से तुम क्या समझते हो ? (११) जीर्णोद्धार किसे कहते हैं ? किन किन जैनतीर्थों के जीर्णोद्धार की विशेष आवश्यकता है ? 'जीर्णोद्धार कार्य नया मन्दिर बनवाने की अपेक्षा अधिक आवश्यक और महान् पुण्यबन्ध का कारण है' इसके पक्ष में कुछ लिखो । (१२) तीर्थक्षेत्रों की उन्नति के कुछ उपाय बताओ ? (१३) तीर्थयात्रा में एक यात्री की दिनचर्या और व्यवहार कैसा होना चाहिये ? उसे यात्रा में क्या क्या सावधानी रखना चाहिये ? (१४) अप्रगट तीर्थ कौन-कौन से हैं और उनका पता लगाना क्यों आवश्यक है ? Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034882
Book TitleJain Tirth aur Unki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherDigambar Jain Parishad Publishing House
Publication Year1946
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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