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________________ श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन २. प्रेमजीभाई इनका जन्म सं० १९४६ के मगर वदि ११ को हा था। इनके दो लग्न हुए हैं। पहले लग्न सं० १९६२ में श्रीमती कुँवरवाई के साथ हुए । इनसे मं० १९६६ में चुन्नीलाल नामका पुत्र हुआ । चुनीलालके वृजलाल नामका एक पुत्र है। श्रीमती कुँवरवाईने सं० १९७८ में दीक्षा लेली। प्रेमजीभाईने सं० १९६६ में दूसरे लग्न श्रीमती मांकचाईके साथ किये थे। इनसे एक पोपटमाई नामका पुत्र सं० १९६८ में हुआ। ३. नानजीभाई इनका जन्म संवत् १९४९ के मार्गशीर्ष सुदि २ को हुआ। सं० १९६२ के वैशाखमें गाँव विदडा (कच्छ) के सा पदमसी पूँनाकी पुत्री श्रीमती वेलबाई के साय इनके लग्न हुए। इनसे एक नेमजी नामके पुत्र सं० १९६५ के वैशाख सुदि ६ को हुए । नेमजीके एक पुत्र है । उसका नाम रमणिकलाल है। मोलह बरसकी आयुमें ये पेढीपर काम करने लगे। ये सार्वजनिक कामोंमें बड़ा उत्साह दिखाते हैं। नीचे लिखी संस्थाओंमें ये ऑनरेरी काम कर रहे हैं। श्री कच्छी ओसवाल देहरावासी जैन पाठशाला, पूरबाई जैन कन्याशाला, राइस मर्चट एसोसिएशन और पालीताना जैन बालाश्रममके ये सेक्रेटरी हैं। कच्छी वीसा ओसवाल जैन Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034871
Book TitleJain Ratna Khand 01 ya Choubis Tirthankar Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKrushnalal Varma
PublisherGranth Bhandar
Publication Year1935
Total Pages898
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size96 MB
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