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________________ १६ श्री शांतिनाथ-चरित १६१ कन्या सत्यभामा अब जवान हो गई है । इसलिए उसकी शादीका कहीं इन्तजाम कीजिए । जिसके घर जवान कन्या हो, कर्ज हो, वैर हो और रोग हो उसे शांतिसे नींद कैसे आ सकती है ? मगर आप तो बेफिक्र हैं।" सत्यकीने जवाब दिया:-" मैंने इसके लिए योग्य वर ढूँढ लिया है । कपिल मेरी निगाहमें सब तरहसे लायक है । अगर तुम्हारी सलाह हो तो सत्यभामाके साथ इसकी शादी कर दी जाय । " ___ जंबुकाको यह बात ठीक लगी। यह उसके लिए और भी संतोषकी बात हुई कि कपिलके साथ शादी होनेसे कन्या घरपर ही रहेगी। शुभ मुहूर्तमें दोनोंकी शादी हो गई। सुखसे उनके दिन बीतने लगे। विद्वत्ता और मिष्ट व्यवहारके कारण लोग उसको बहुत भेटें देने लगे । जिससे उसके पास धन भी काफी हो गया । कुछ समयके बाद उसके सास ससुरका देहांत हो गया। ___एक बार कपिल कहीं नाटक देखने गया था। रात अंधेरी थी। जोरसे पानी बरस रहा था। इसलिए लौटते समय कपिलने अपने कपड़े उतारकर बगलमें दबाये और वह नंगा ही घरपर चला आया। अपने दालानमें आकर उसने दर्वाजा खुलवाया। सत्यभामाने दर्वाजा खोला और कहा:-" ठहरिए मैं सूखे कपड़े ले आती हूँ।" कपिलने कहा:-" मेरे कपड़े सूखे ही हैं । विद्याके बलसे मैंने उन्हें नहीं भीगने दिया ।" ___ मगर घरमें आनेपर सत्यभामाने देखा कि कपिलका सिर गीला है और पैर भी गीले हैं। बुद्धिमती कपिला समझ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034871
Book TitleJain Ratna Khand 01 ya Choubis Tirthankar Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKrushnalal Varma
PublisherGranth Bhandar
Publication Year1935
Total Pages898
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size96 MB
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