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________________ U न. - पावापुरी नगरीके हस्तिपाल राजाकी दफतर लिखनेकी सना में निर्वाण हुआ था, और विक्रमसें ४७० वर्ष पहिलें और संप्रति कालके १९९४५ के सालसें २४१५ वर्ष पहिलें, निर्वाण हुआ था. प्र. ८६ - जिस दिन जगवंतका निर्वाण हुआ था सो कौनसा दिन वा रात्रिथी ? न. - नगवंतका निर्वाण कार्त्तिक वदि अमावस्या की रात्रि के अंतमें हुआ था. प्र. 09- तिस दिन रात्रिकी यादगीरी वास्ते कोइ पर्व हिंदुस्थानमे चलता है वा नही ? न - हिंदु लोक में जो दिवालीका पर्व चलताहै, सो श्री महावीरके निर्वाणके निमत्त सेंदी चलता है. प्र. ८८ - दिवालिको उत्पत्ति श्री महावीरके निर्वाणसें किसतरें प्रचलित हुदै ? न. - जिस रात्रि में श्रोमहावीरका निर्वाण हुआ था, निम रात्रिमें नव मल्लिक जातिके राजे और नव की जातिके राजे जो चेटक महाराजाके सामंत थे, तिनोन तहां उपवास रूप Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034862
Book TitleJain Dharm Vishayak Prashnottar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Atmanand Sabha
PublisherJain Atmanand Sabha
Publication Year1907
Total Pages270
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size13 MB
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