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________________ . १६ : हिमालय दिगदर्शन तककी कड़ी चढाई शुरू होती है । यहांसे दो मील छोटी बीजनी तक पानी का भी कष्ट रहता है। यात्रीको चाहिये कि ये चढाई सुबह जल्दीसे पार करनेपर एक मीलकी साधारण चठाई तय करनी होगी, बादमें ३ भील तक उतार ही उतार होगा। (६) बन्दरमेल चट्टी-यह चट्टी नीचे भागीरथीके किनारे हैं । यहां गरमी अधिक रहती है । यहांसे आगे कुछ सीधा मार्ग तय करने पर ०॥ मीलकी कड़ी चढाईका अनुभव करना पड़ता है, बादमें कुछ उतारके बाद सीधा रास्ता है । बीचमें प्याऊ रहती है। (७) महादेव चट्टी- यहां शिव-पार्वतीका मन्दिर है यहाँका स्थान अच्छा है। . (८) काण्डी चट्टी-यहाँकी बस्ती बड़ी है । यहाँ मोपालजीका मंदिर हैं। उसके सामने जामुन-वृक्षकी छायामें लम्बी तिपाई रक्खी है, उसपर थके-माँदे यात्री बैठकर विश्राम लेते है। यहां अस्पताल है। यहाँसे आगे करीब २॥ मील मानेपर o मील असाधारण उतार आती है, उतारके बाद भूला पार कर व्यासघाट जाया जाता है। (९) व्यासपाट-यहाँ व्यास गंगा और भागीरथी का संगम है। व्यासजीका मंदिर है। बाजार ठीक है । यहाँ संगमपर स्नान होता है । यहाँ बाबा कालीकमली वालेकी धर्मशाला और सदाबत है । व्यासजीका असल मंदिर आगे Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034845
Book TitleHimalay Digdarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPriyankarvijay
PublisherSamu Dalichand Jain Granthmala
Publication Year1941
Total Pages86
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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