SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 89
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ [७८ ] (१४) प्रभावकचरित्र-ऐतिहासिक विषयका यह उत्तम ग्रन्थ है, श्रीमान् प्रभाचन्द्र आचार्यने इसको वि. सं. १३३४ में बनाया है। इसमें वज्रस्वामी आदिके २२ प्रबंध है (१५) प्रबन्ध चिन्तामणि-इसके कर्ता हैं मेरु तुंगाचार्य वि. सं. १३६१ में इसको बनाया है. (१६) श्री तीर्थकल्प-इसके कर्ता श्रीमान् जिनप्रभमूरि हैं इस ग्रन्थका दूसरा नाम कल्पप्रदीप है जिनप्रभसूरि वि. सं. १३६५ में हुए हैं इस ग्रन्थमें करीब ५८ कल्प और स्तव हैं.. (१७) विचारश्रेणी-इसके कर्ता मेरु तुंगाचार्य हैं। यह ग्रन्थ अंचलगच्छीय आचार्यने बनाया है इस ग्रन्थसेभी गुजरातके चावडा राजाओंके राजत्व समय पता मिलता है. (१८) स्थविरावली-इसके कर्ताभी अंचलगच्छीय मेरु तुंगाचार्यही हैं इसमें कई आचार्योका वर्णन है। (१९) मच्छपबन्ध-इसके कर्ता हैं ककसूरि वि. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Unnaway. Surratagyanbhandar.com
SR No.034829
Book TitleGirnar Galp
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLalitvijay
PublisherHansvijayji Free Jain Library
Publication Year1921
Total Pages140
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy