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________________ अंग ऐसा ढीला और कमजोर पड़जाता है कि, उन्हें रगड़ रगड़े कर दिन पूरे करने पड़ते हैं । इसका कारण क्या है ? इसका कारण यही है कि, उन्होंने ब्रह्मचर्य उतने प्रमाणमें नहीं पाला। विपरीत इसके कई साठ साठ सत्तर सत्तर वर्षके वृद्ध ऐसे देखने में आते हैं कि, जो २५-३० वर्षके जवानोंसे भी दुगना काम करते हैं। वे-१०-५ कोस चल ही नहीं सकते हैं बल्के २०-२५ सेर बोझा उठाकर ले जाना हो, तो उसे भी वे बड़े मजेसे उठाकर लेजा सकते हैं। उनकी आँखोंका तेज भी बहुत अच्छा होता है । इसका कारण ? इसका कारण यही है कि, उन्होंने अपने जीवन में वीर्यका दुरुपयोग नहीं किया है। उन्होंने संसारसेवन उचित रीतिसे किया है। इसीलिये वे वृद्धावस्थामें भी मजबूत शरीरवाले और शक्तिवान हैं । एकपत्नीव्रतकी आवश्यकता। गृहस्थोंको मुख्यतया, अपने ब्रह्मचर्यकी अंगभूत एक दूसरी बात और ध्यानमें रखनी चाहिए । वह यह है कि, एक स्त्री होने पर दूसरी स्त्री कदापि नहीं करनी चाहिये । एकसे ज्यादा स्त्री करने वाला भी ब्रह्मचर्य भंग करनेवाला कहा जाता है । एक हिन्दी कविने कहा है कि-'जाके एक नारी वही ब्रह्मचारी है। बात बिल्कुल सत्य है । एक पत्नीव्रतवाला गृहस्थ सचमुच ही ब्रह्मचारी गिना जाने योग्य है । यदि दीर्घदृष्टिसे देखेंगे तो ज्ञात होगा कि, दो स्त्रियोंके पतिको सांसारिक सुख भी कुछ नहीं मिलते Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034783
Book TitleBramhacharya Digdarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaydharmsuri, Lilavat
PublisherYashovijay Jain Granthmala
Publication Year1925
Total Pages108
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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