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________________ १३ भारत को दशा राजधानी "कंपिल्ल" ( कांपिल्य) और दक्षिणी पंचाल की राजधानी कन्नौज थी। प्राचीन कांपिल्य नगर कदाचित् गंगा के किनारे वर्तमान बदाऊँ और फर्रुखाबाद के बीच में था। (११) मत्स्यों का राज्य-महाभारत के समय में मत्स्य राज्य राजा विराट के अधिकार में था । वर्तमान अलवर, जयपुर और भरतपुर के कुछ हिस्से प्राचीन मत्स्य-राज्य में थे। राजा विराट की राजधानी जयपुर रियासत में कदाचित् बैराट नामक स्थान में थी। (१२) शूरसेनों का राज्य-शूरसेन-राज्य की राजधानी यमुना नदी के किनारे पर प्राचीन "मधुरा" (मथुरा) नगरी थी। मनुस्मृति (अध्या० २, श्लो० १९) में लिखा है-"कुरुक्षेत्र और मत्स्य देश तथा पंचाल और शूरसेन सब मिलकर ब्रह्मर्षि देश कहलाते हैं।" (१३) अश्मकों का राज्य-अश्मक-राज्य गोदावरी नदी के किनारे पर था और इसकी राजधानी पोतन या पोतली थी। (१४) अवन्तियों का राज्य-अवन्ति राज्य के दो विभाग थे । इसका उत्तरी भाग केवल "अवन्ति" कहलाता था और उसकी राजधानी उज्जयिनी थी; और इसका दक्षिणी भाग अवंतिदक्षिणापथ कहलाता था और उसकी राजधानी माहिस्सती (माहिष्मती) थी। (१५) गंधारों का राज्य-गंधार-राज्य में पश्चिमी पंजाब और पूर्वी अफगानिस्तान शामिल था। इसकी राजधानी तक सिला (तक्षशिला) थी। प्राचीन तक्षशिला नगरी आजकल के रावलपिंडी जिले के सराय काला नामक स्टेशन के पास थी। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034762
Book TitleBauddhkalin Bharat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJanardan Bhatt
PublisherSahitya Ratnamala Karyalay
Publication Year1926
Total Pages418
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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