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________________ ८५ सिद्धान्त और उपदेश भिक्षुओं और ब्राह्मणों को गृहस्थ के प्रति इस प्रकार प्रीति दिखलानी चाहिए (१) उसे पाप करने से रोकना चाहिए। (२) उसे पुण्य करने की शिक्षा देनी चाहिए । (३) उसके ऊपर दया-भाव रखना चाहिए । (४) उसे धर्म की शिक्षा देनी चाहिए। (५) उसके सन्देह दूर करके स्वर्ग का मार्ग बतलाना चाहिए। अब हम गौतम बुद्ध की कर्तव्य-विषयक आज्ञाओं को छोड़ कर उनकी परोपकार-विषयक आज्ञाओं और वचनों का वर्णन करेंगे, जिनके कारण बौद्ध धर्म ने संसार में इतनी प्रसिद्धि पाई है । गौतम बुद्ध का धर्म परोपकार और प्रीति का धर्म है। नीचे के वाक्यों में परोपकार और प्रीति की बहुत ऊँची शिक्षा दी गई है। “घृणा कभी घृणा से दूर नहीं होती; घृणा केवल प्रीति से दूर होती है-यही इसका स्वभाव है।" "हम लोगों को प्रीति-पूर्वक रहना चाहिए और उन लोगों से घृणा नहीं करनी चाहिए, जो हमसे घृणा करते हैं। जो लोग हमसे घृणा करते हैं, उनके बीच हमें घृणा से रहित होकर रहना चाहिए।" ___"क्रोध को प्रीति से जीतना चाहिए, बुराई को भलाई से जीतना चाहिए, लालच को उदारता से जीतना चाहिए, और झूठ को सत्य से जीतना चाहिए।"* ... गौतम बुद्ध ने अपने अनुयायियों को पुण्य और भलाई के • धम्मपद-५. ११७. २२३. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034762
Book TitleBauddhkalin Bharat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJanardan Bhatt
PublisherSahitya Ratnamala Karyalay
Publication Year1926
Total Pages418
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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