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नम्र सूचना____ आ अभिप्रायोवाळु ट्रेकट प्रेसमां जतां अमारी नजर दाक्तर त्रिभुवदास. ले०ना " गुजराती " मां आवेला जवाब तरफ गइ छे. तेमां तेओए जे काइ लख्युं छे तेनां जवाब माटे अमोए आचार्यश्री विजयेन्द्रसूरिजी महाराजनुं ध्यान खेंचेल छे अने तेनी पोकलता पण समये बहार पडशे एम आशा. राखीये छीए.
अने "जैन" पेपरमां आचार्य महाराजश्रीए पूछेला प्रश्नोनां जवाब आपवामां जे वक्रता डॉक्टर साहेबे करी छे अने पोते तेमां केवा बंधाया छे तेनो पण जवाब बहार पडशे त्यारे विद्वत् समाज डॉक्टर साहेबर्नु इतिहासमां केटलं ज्ञान छे ते वधारे समजशे.
अमोने लागे छे के दाक्तर साहेबने इतिहासनी स्पष्ट वस्तु बहार आवे तेमां थतां खर्चनी बहु फिकर रहे छे. त्यारे डॉक्टर साहेबे जे लल्युं छे ते तेमने तेम जळवाइ रहे तो वधारे सारं एम दाक्तर साहेबनी जो खरेखर मान्यता होय तो पछी ए स्वयंभित्ति पोतानी नबळाइ आडकतरी रीते जाहेर प्रदर्शित थइ आवे छे. माटे दाक्तर साहेबने विनंती छे के आपे सत्यवस्तु जाहेर थाय ते माटे थता खर्चना पैसानी बहु फिकर न करवी जोइए. .. प्रकाशक. . मुद्रकः-शा. गुलाबचंद लल्लुभाई, श्री महोदयः प्री. प्रेस-भावनगर.
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