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________________ मातीश जैनशासनप्रभावक व्याख्यानवाचस्पति कविदिवाकर आबालब्रह्मचारी महान्तपस्वी प्रातःस्मरणीय श्रीमत् आचार्यदेव श्री रंगविमलसरीश्वरजी महाराज साहेबना परिश्रमथी तेमज उपदेशश्री आ ग्रन्थने ड्राइंग पेपरमा प्रकाशित कराव्यो छे, तो आ ग्रन्थने सहृदयी विद्वद्वर्य स्वीकार करी तेनो लाभ उठावशे एटले आ प्रकाशन सफल थयुं मानीश. आ ग्रन्थनी शुद्धि माटे यथाशक्ति साहित्याचार्य श्रीमान् पंडित माधवानन्द शास्त्रीए प्रयत्न कर्यो छे, छतां दृष्टिदोष तथा प्रेसदोष विगेरेने लइने कोइ स्थले स्खलना जणाय तो विद्वद्वर्ग क्षमा करे ने साथे सूचना करे. .. अमदावाद (राजनगर) ठे० देवशाना पाडामा विमलगच्छनो उपाश्रय वि. सं. २००७ मागशर सुदि १५) पूज्यपाद प्रसिद्धक्ता श्रीमद् आचार्यदेव श्रीरंगविमल सूरीश्वरजी महाराजान्तेवासी प्रवर्तक मुनिश्री कनकविमलजी. Shree Sudhammaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034745
Book TitleAnjanasundari Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuktivimalgani
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1951
Total Pages60
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size5 MB
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