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________________ नि....वे....द....न अमारी आ श्री मुक्तिविमलजी जैन ग्रन्थमालामांथी सत्तरमा ग्रन्थ तरीके " श्री अञ्जना सुंदरी चरित्र" विद्वानाना पूनित करकमलमां रजु करतां अमो हर्षित थईए ए स्वाभाविक छे. आ ग्रन्थना रचयिता परमपूज्य विश्ववंदनीय अखंडब्रह्मचारी सकलसंवेगीशीरोमणि तपोनिधि तपागच्छाधिपति श्रीमत्पंन्यासप्रवर श्री दयाविमलगणिवरशिष्य शांतमूर्ति पंडीतप्रवर श्रीमत्पंन्यास श्रीसौभाग्यविमलगणिवरान्तेवासी परमपूज्य सकलसिद्धांत वाचस्पति अनेकसंस्कृतग्रन्थप्रणेता सच्चारित्रचूडामणि बालब्रह्मचारी विद्वन्मार्तण्ड श्रीमत्पंन्यासप्रवर श्रीमुक्तिविमलगणिवर महाराज साहेब छे. आ ग्रन्थ स्व० पू० गुरुदेव सं. १९७४ ना भादवा सुदि ४ ना पूनित दिवसे स्वर्गवास पाम्या तेथी अपूर्ण अस्तव्यस्त दशामां हतो तेथी आ ग्रन्थने तेओश्रीना अनन्य पट्टालंकार विद्वान् शिष्यरत्न पूज्यपाद जैनागमपरिशीलनशाली Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034745
Book TitleAnjanasundari Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuktivimalgani
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1951
Total Pages60
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size5 MB
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