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________________ ** * * * * * * * श्री मुक्तिविमलजी जैनग्रन्थमाला-ग्रन्थाङ्क १७ ॥ ॐ हो श्री अहं श्री शंखेश्वरपार्श्वनाथाय नमः ॥ । परमपूज्य विश्ववंदनीय-तपोनिधि-निष्कलंकचारित्रचूडामणि सकलसंवेगीशीरोमणि तपागच्छाधिपति श्रीम त्पन्यासप्रवरश्री दयाविमलगणि-शांतमूर्ति श्रीमत्पन्यास श्रीसौभाग्यविमलगणिवर पादपद्मभ्यो नमोनमः॥ ॥ परमपूज्य सकलसिद्धांतवाचस्पति अनेकसंस्कृतग्रन्थप्रणेताश्रीमत्पन्यास प्रवर श्रीमुक्तिविमलगणि विरचितः ॥ ॥श्री अञ्जनासुन्दरीचरित्रम् ॥ विमलगच्छीय प्रवर्तिनी विदुषी साध्वी नवलश्रीजी तथा तन्छिया साध्वी उत्तमश्रीजी स्मरणार्थ तत्शिष्या साची मंगलश्रीजी सदुपदेशेन श्रीमुक्तिविमलजी जैनरन्थमालायाः कार्यवाहक नगरशेठ मणिलाल मोहनलालेन प्रकाशितम् । संशोधक प्रवर्तक-मुनिश्री कनकविमलजी. वीर सं. २४७७ ] ज्ञानमूरि २२५ मुक्ति सं. ३३ [वि. सं. २००७ पञ्चशतः प्रतयः । मूल्यम् ०-८-० **** * * ** * * ** ** * ** * ** * * * * * * * * * * * * * * * www.umaragyanbhandar.com Shree Sudhammaswami Gyanbhandar-Umara, Surat
SR No.034745
Book TitleAnjanasundari Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuktivimalgani
PublisherMuktivimal Jain Granthmala
Publication Year1951
Total Pages60
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size5 MB
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