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अधिकमास निर्णय.
कालचूला बनेगा. चौमासीसे पचासरोजकी गिनतीमें दुसरे श्रावणमें पर्युषणपर्व आयगे, इस लिये पहला अधिकमहिना कालचूला मानना प्रमाणसिद्ध है.
३६-सवाल चोथा, मेरुके कितने हिस्सेको जैनशास्त्रोमें क्षेत्रचूला कहीहै ? वैसेही उद्धलोकमेंभी चूला मानी गई है. उनसब जगह मनुष्यचोटीका दृष्टांत घटा सकते हो ?
( जवाब.) हां! घटा सकताहूं. मेरुपर्वत लाख योजनका कहा, उसपर जो (४०) योजनकी क्षेत्रचूला कही है. वो लाख योजनमें नही गिनीजाती. इसीतरह मनुष्यचोटीभी मनुष्यके मापमें नही गिनीजाती, और वैसे अधिकमहिनाभी नही गिनाजाता, देखिये! मनुष्यचोटीका दृष्टांत घटगया-या नही ? उद्धलोकमें जो क्षेत्रचूला मानी गइहै-वोभी उनउनजगहकी गिनतीसे बहारहै, एसा जानना.
३७-सवाल पांचमा, जैन ज्योतिषमुजब अधिकमासका कितना प्रमाण? और अभिवर्द्धित माहिनेका क्या स्वरूप ?
और कितना प्रमाण? बतला सकतेहो ? यहां जवानी जमाखर्च नहीं चलेगा, गणित दिखलाना होगा.
( जवाब.) गणितकरके दिखलाता. सुनिये! मेरे यहां जबानी जमाखर्च नहींहै. मुताबिक जैन ज्योतिषके अधिक मासका प्रमाण इसतरहहै, खयाल किजिये ! एक चांद्रमास और ओगणत्रीस दिनपर बासठीये बत्तीस भांग इतना अधिकमासका प्रमाणहै. अब अभिवर्धित महिनेका स्वरूप सुनिये ! एकतीस दिनके उपर एकसोचोवीस भागात्मक एक
सोएकीस भागका अभिवर्द्धित माहिना होताहै. इस अपेक्षा ___Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com