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________________ आगम सूत्र ५, अंगसूत्र-५, 'भगवती/व्याख्याप्रज्ञप्ति-1' शतक/शतकशतक/उद्देशक/ सूत्रांक द्रव्यलोक, क्षेत्रलोक, काललोक और भावलोक।। भगवन् ! क्षेत्रलोक कितने प्रकार का है ? गौतम ! तीन प्रकार का । यथा-अधोलोक-क्षेत्रलोक, तिर्यग्लोकक्षेत्रलोक और ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक । भगवन् ! अधोलोक-क्षेत्रलोक कितने प्रकार का है ? गौतम ! सात प्रकार का यथा-रत्नप्रभापृथ्वी-अधोलोक-क्षेत्रलोक, यावत् अधःसप्तमपृथ्वी-अधोलोक-क्षेत्रलोक | भगवन् ! तिर्यग्लोकक्षेत्रलोक कितने प्रकार का है ? गौतम ! असंख्यात प्रकार का यथा-जम्बूद्वीप-तिर्यग्लोक-क्षेत्रलोक, यावत् स्वयम्भूरमणसमुद्र-तिर्यग्लोक-क्षेत्रलोक । भगवन् ! ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक कितने प्रकार का है? गौतम ! पन्द्रह प्रकार का है यथा-सौधर्मकल्प-ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक, यावत् अच्युतकल्प-ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक, ग्रैवेयक विमान-ऊर्ध्व-लोकक्षेत्रलोक, अनुत्तरविमान-ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक और ईषत्प्राग्भारपृथ्वी-ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक । भगवन् ! अधोलोक-क्षेत्रलोक का किस प्रकार का संस्थान है ? गौतम ! त्रपा के आकार का है। भगवन् ! तिर्यग्लोक-क्षेत्रलोक का संस्थान किस प्रकार का है ? गौतम ! झालर के आकार का है। भगवन् ! ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक किस प्रकार के संस्थान का है ? गौतम ! ऊर्ध्वमृदंग के आकार का है। भगवन् ! लोक का संस्थान किस प्रकार का है ? गौतम ! सुप्रतिष्ठक के आकार का । यथा-वह नीचे विस्तीर्ण है, मध्य में संक्षिप्त है, इत्यादि सातवें शतक में कहे अनुसार जानना । यावत्-उस लोक को उत्पन्न ज्ञान-दर्शन-धारक केवलज्ञानी जानते हैं, इसके पश्चात वे सिद्ध होते हैं, यावत् समस्त दुःखों का अन्त करते हैं । भगवन् ! अलोक का असंस्थान कैसा है ? गौतम ! अलोक का संस्थान पोले गोले के समान है। भगवन् ! अधोलोक-क्षेत्रलोक में क्या जीव हैं, जीव का देश हैं, जीव के प्रदेश हैं ? अजीव हैं, अजीव के प्रदेश हैं ? गौतम ! दसवें शतक के ऐन्द्री दिशा समान कहना । यावत्-अद्धा-समय रूप है । भगवन् ! क्या तिर्यग्लोक में जीव हैं ? इत्यादि प्रश्न । गौतम ! पूर्ववत् जानना । इसी प्रकार ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक के विषय में भी जानना, इतना विशेष है कि ऊर्ध्वलोक में अरूपी के छह भेद ही हैं, क्योंकि वहाँ अद्धासमय नहीं है। भगवन् ! क्या लोक में जीव हैं ? इत्यादि प्रश्न | गौतम ! दूसरे शतक के अस्ति उद्देशकके लोकाकाश के विषय में जीवादि के कथन समान, विशेष इतना है कि यहाँ अरूपी के सात भेद कहने चाहिए, यावत् अधर्मास्ति-काय के प्रदेश, आकाशास्तिकाय का देश, आकाशास्तिकाय के प्रदेश और अद्धा-समय । शेष पूर्ववत् । भगवन् ! क्या अलोक में जीव हैं ? गौतम ! दूसरे शतक के दसवें अस्तिकाय उद्देशक में अलोकाकाश के विषय अनुसार जानना; यावत् वह अनन्तवें भाग न्यन हैं। भगवन! अधोलोक-क्षेत्रलोक के एक आकाशप्रदेश में क्या जीव हैं; जीव के देश हैं, जीव के प्रदेश हैं, अजीव हैं, अजीव के देश हैं या अजीव के प्रदेश हैं ? गौतम ! (वहाँ) जीव नहीं, किन्तु जीवों के देश हैं, जीवों के प्रदेश भी हैं, यथा अजीव हैं, अजीवों के देश हैं और अजीवों के प्रदेश भी हैं । इनमें जो जीवों के देश हैं, वे नियम से एकेन्द्रिय जीवों के देश हैं, अथवा एकेन्द्रियों के देश और द्वीन्द्रिय जीव का एक देश है, अथवा एकेन्द्रिय जीवों के देश और द्वीन्द्रिय जीव के देश हैं; इसी प्रकार मध्यम भंग-रहित, शेष भंग, यावत् अनिन्द्रिय तक जानना, यावत् अथवा एकेन्द्रिय जीवों के देश और अनिन्द्रिय जीवों के देश हैं । इनमें जो जीवों के प्रदेश हैं, वे नियम से एकेन्द्रिय जीवों के प्रदेश हैं, अथवा एकेन्द्रिय जीवों के प्रदेश और एक द्वीन्द्रिय जीव के प्रदेश हैं, अथवा एकेन्द्रिय जीवों का प्रदेश और द्वीन्द्रिय जीवों के प्रदेश हैं । इसी प्रकार यावत् पंचेन्द्रिय तक प्रथम भंग को छोड़कर दो-दो भंग कहना, अनिन्द्रिय में तीनों भंग कहना । उनमें जो अजीव हैं, वे दो प्रकार के हैं यथा-रूपी अजीव और अरूपी अजीव । रूपी अजीवों का वर्णन पूर्ववत् । अरूपी अजीव पाँच प्रकार हैं-यथा धर्मास्तिकाय का देश, धर्मास्तिकाय का प्रदेश, अधर्मास्तिकाय का देश, अधर्मास्तिकाय का प्रदेश और अद्धा-समय । भगवन् ! क्या तिर्यग्लोक-क्षेत्रलोक के एक आकाशप्रदेश में जीव हैं; इत्यादि प्रश्न । गौतम ! अधोलोक-क्षेत्रलोक के समान तिर्यग्लोक-क्षेत्रलोक के विषय में समझ लेना । इस प्रकार ऊर्ध्वलोक-क्षेत्रलोक के एक आकाशप्रदेश के विषय में भी जानना । विशेष इतना है कि वहाँ अद्धा-समय नहीं है, (इस कारण) वहाँ चार प्रकार के अरूपी अजीव हैं । लोक के एक आकाशप्रदेश के विषय में भी अधोलोक-क्षेत्रलोक के आकाशप्रदेश के कथन के समान जानना । भगवन् ! क्या अलोक के एक आकाशप्रदेश में मुनि दीपरत्नसागर कृत् "(भगवती) आगमसूत्र-हिन्द-अनुवाद" Page 237
SR No.034671
Book TitleAgam 05 Bhagwati Sutra Part 01 Hindi Anuwad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDipratnasagar, Deepratnasagar
Publication Year2019
Total Pages250
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 05, & agam_bhagwati
File Size6 MB
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