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________________ श्री सुधर्मगष्ठ परीक्षा. (४५) नो नारा सम्यक्त्वनो वास याय डे, किं बहुना तथा महानिशीथसूत्रमां उपधानविधिनी हकीकत बे ते कया कया सूत्रनी बे; ते बींना सविस्तर त्यां च्यापेली बे.. जे उपधानविधि करे बे तेमां करे मिनंते तथा वांदणा तथा वंदितासूत्र तथा पञ्चखाणसूत्रना उपधान मूकी फक्त नवकार १, इरियावदी २, लोगस्स ३, शक्रस्तव ( नमोत्थु ) ४, पुखरवरदी ५, सिद्धाणं बुझाएं ६, घाटलामां आवश्यकना उपधान थाय बे; एम कोइ माने बे, परंतु तेम मनाय नदि; कारण के तेमां सामायक, (करे मिते) वांदणा, वंदितु, पञ्चखाण, या चार यावश्यकना उपधानतप वह्याविना संपूर्ण यावश्यकना उपधान मनाय नहि. छाने मात्र चैत्यवंदन विधिना उपधान कहो तो मात्र चैत्यवंदननी विधिना उपधान गणाय, पण आवश्यकना गणाय नहि. विगेरे विगेरे हकीकत योग्यगुरु गीतार्थं पासे समजवाथी अनिवज्ञान लाज प्रगट थाय बे. ए चिहुंनो जाली सुविचार, कद्देवानो की धो परिहार; शुद्ध करंडा नवि बंडाय, अशुद्धना किम पाट काय ॥ १३० जो कड़े ते जाएया मठपति, क्रियाहीण ने असंयती; ते न कहे सुधा धर्म वाट, तो तेना कांइ जाखोपाट | १३९ जो कड़े सामाचारी एक, तेथे देखाड्या पाट विवेक; Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034619
Book TitleSudharm Gaccha Pariksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBramharshi Muni
PublisherRavji Desar
Publication Year1912
Total Pages94
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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