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________________ [ २ ] पंक्ति - १ ८२ – १ ८५ - २ rrror ८८ - १ ९० - १ मिथ्याभूत वस्तुमें व्यावहारिक अर्थक्रियाकारित्वका उपपादन मिथ्यात्वके मिथ्या होनेपर मी प्रपञ्चके मिथ्यात्वका उपपादन .... औपाधिक जीवके भेदसे सुख आदिके असाङ्कर्यका उपपादन .... जीवोंके सुख आदिके अनुसन्धानमें प्रयोजक उपाधिका विचार .... तृतीय स्तबक [८५ - १००] कोंकी विद्योपयोगिताका विचार केवल आश्रम कोंकी विद्योपयोगिताका विचार संन्यासकी विद्याङ्गताका विचार श्रवणाधिकारवाद अमुख्य अधिकारियों द्वारा विहित श्रवण आदिकी जन्मान्तरमें ___उपयोगिताका विचार निर्गुणकी उपास्यताका विचार ब्रह्मसाक्षात्कार-कारणवाद शाब्दापरोक्षवाद अज्ञाननिवर्तकवाद ब्रह्माकारवृत्तिनाशकवाद चतुर्थ स्तबक [ १०१ – १०९] अविद्यालेशवाद अविद्यानिवृत्ति के स्वरूपका विचार मुक्तिस्वरूपका विचार ब्रह्मवादकी प्राप्यताका विचार मुक्त पुरुषकी ब्रह्मस्वरूपताका विचार ९३ - १ x x. xxs ९८ - ५ ~ १०१ - २ १०२ - ३ ~ rrrr ~ ~ ०७ - १ ~ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034618
Book TitleSiddhant Kalpvalli
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSadashivendra Saraswati
PublisherAchyut Granthmala
Publication Year1941
Total Pages136
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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