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________________ स्वामीको अपने घरपर लेगया । वहां पर भद्रबाहुके माता पिताने श्री गोवर्द्धन स्वामीको ऊंचे आसनपर बिठाकर बहुत सत्कार किया। तब श्री गोवर्धन आचार्यने उनसे कहा कि तुमारा भद्रबाहु एक अच्छा होनहार बालक है । यह समस्त विद्याओं का पारगामी अनुपम विद्वान होगा सो तुम इसको पढानेके लिये मुझको दे दो। मैं इसको समस्त शास्त्र पढाऊंगा। भद्रबाहुके माता पिताने प्रसन्नमुखसे कहा कि महाराज! यह बालक आपका ही है । आपको पूर्ण अधिकार है कि आप इसे अपने मनके अनुसार अपने पास रखकर चाहे जो अध्ययन करावें । हमको इस विषयमें बोलनेका कुछ अधिकार नहीं । ऐसा कहकर उन दोनोंने भद्रबाहुको प्यार करके आशीर्वाद देकर श्री गोवर्द्धन भाचार्यके साथ रवाना कर दिया। ___गोवर्द्धनस्वामीके पास रहकर भद्रबाहु समस्त शास्त्रोंका अध्ययन करने लगा। गुरुने परोपकारिणी बुद्धिसे भद्रबाहुको अच्छी तरह पढाया और भद्रबाहुने भी गुरुके विनय. आज्ञापालन आदि गुणोंसे गुरुके हृदयको प्रसन्न करते हुए थोडेसे समयमें समस्त शास्त्र पढ लिये । ज्ञानावरण कर्मके प्रबल क्षयोपशमको प्राप्त कर तथा गुरु गोवर्द्धनका अनुग्रहपूर्ण प्रसाद पाकर भद्रबाहुने सिद्धांत, न्याय, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, छन्द आदि सब विषय तथा ग्यारह अंग, चौदह पूर्व, समस्त अनुयोग पढकर धारण कर लिये । समस्त विद्याओंमें पारगाभी हो जाने पर भद्रबाहुने अपने गुरु श्री गोवर्द्धन स्वामीसे अपने माता पिताके पास जानेके लिये विनयपूर्वक आज्ञा मांगी। गोवर्द्धन स्वामीने आशीर्वाद देकर भद्रबाहुको घर जानेकी आज्ञा दे दी। भद्रबाहु अपनेको अनुपम विद्वान जानकर जब अपने घर पहुंचे तो उनके माता पिता उनको देखकर बहुत प्रसन्न हुए । भद्रबाहुकी प्रखर विद्वत्ताकी प्रशंसा सर्वत्र होने लगी । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034616
Book TitleShwetambar Mat Samiksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAjitkumar Shastri
PublisherBansidhar Pandit
Publication Year1930
Total Pages288
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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